
नई दिल्ली । दिल्ली की अदालत (Court) ने कहा कि एआई इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit) के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के कार्यकर्ताओं का शर्टलेस विरोध प्रदर्शन (shirtless protest) असहमति जताने का वैध तरीका नहीं था। कोर्ट ने इसे “सार्वजनिक व्यवस्था पर सीधा हमला” बताते हुए कहा कि इससे भारत की डिप्लोमैटिक इमेज को भी नुकसान पहुंचा।
चार आरोपियों को पुलिस कस्टडी में भेजा
ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रवि की अदालत ने शनिवार को शर्टलेस विरोध प्रदर्शन के आरोप में गिरफ्तार चार यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों में बिहार से राष्ट्रीय सचिव कृष्णा हरि और प्रदेश सचिव कुंदन यादव, उत्तर प्रदेश से प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार और तेलंगाना से नरसिंह यादव शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच में संदिग्ध साजिश के संकेत
कोर्ट ने कहा कि चारों आरोपी दूर-दराज के राज्यों से हैं, जिससे फरार होने का खतरा अधिक है। प्रारंभिक जांच में बाहरी साजिश से जुड़े संकेत भी मिले हैं, जो मामले की गंभीरता बढ़ाते हैं। मजिस्ट्रेट रवि के आदेश में उल्लेख है कि प्रदर्शन ने न केवल समिट की शुचिता को खतरे में डाला, बल्कि भारत की कूटनीतिक छवि को भी प्रभावित किया।
आरोपों का विवरण
अदालत ने कहा कि आरोपियों ने वैश्विक प्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी में आयोजित एआई समिट के हाई सिक्योरिटी परिसर में घुसने की सुनियोजित योजना बनाई। प्रदर्शनकारियों ने भड़काऊ नारों वाली टी-शर्ट पहन रखी थी, जिन पर “पीएम कॉम्प्रोमाइज्ड” जैसे आपत्तिजनक संदेश लिखे थे। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाली और शारीरिक हमले किए, जिससे कुछ पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए।
सार्वजनिक व्यवस्था पर हमला
मजिस्ट्रेट ने कहा, “यह व्यवहार वैध असहमति की सीमा से परे है और सार्वजनिक व्यवस्था पर स्पष्ट हमला है। इससे न केवल आयोजन की गरिमा प्रभावित हुई, बल्कि विदेशियों के सामने देश की डिप्लोमैटिक छवि भी नुकसान पहुंचा।” कोर्ट ने यह भी कहा कि कई सहयोगी अब भी फरार हो सकते हैं और डिजिटल एवं वित्तीय सबूतों में छेड़छाड़ कर सकते हैं।
गंभीर जांच और कानूनी धाराएं
अदालत ने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर हुए इस विरोध प्रदर्शन की गहन जांच आवश्यक है, क्योंकि यह सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। भारतीय दंड संहिता की धारा 121 (लोक सेवक को कर्तव्य से रोकने के लिए चोट पहुँचाना) और धारा 61 (2) (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत आरोपी को तीन साल से अधिक की सजा हो सकती है। चारों आरोपियों को 25 फरवरी तक पांच दिन की पुलिस हिरासत में रखने की अनुमति दी गई है।
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