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कश्मीर से जेएनयू तक बयानबाज़ी तेज: गिरिराज सिंह बोले- चूहे के बिल की तरह कश्मीर में घुसेड़ दिया

February 24, 2026

नई दिल्‍ली। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) ने देश की सुरक्षा स्थिति और विश्वविद्यालयी राजनीति को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि पहले देश के कई हिस्सों में आतंकी घटनाएं और विस्फोट आम थे, लेकिन अब हालात में बड़ा बदलाव आया है। उनके अनुसार, कश्मीर में पथराव (Stone pelting in kashmir) की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है और सुरक्षा एजेंसियां उग्रवाद के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

जेएनयू में वामपंथी समूहों और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प पर बोलते हुए गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि जेएनयू में वामपंथी विचारधारा नहीं मानने वाले छात्रों को पीटा जाता है। उन्होंने कहा कि कल भी ऐसा ही हुआ, जहां गैर-वामपंथी छात्रों पर हमला किया गया। सिंह ने मांग की कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि विश्वविद्यालय में शांति और पढ़ाई का माहौल बना रहे। उन्होंने इस घटना को वामपंथी ताकतों की असहिष्णुता का उदाहरण बताया।
जेएनयू में किस बात पर बवाल



  • जेएनयू कैंपस में रविवार देर रात विरोध मार्च के दौरान वामपंथी और दक्षिणपंथी रुझान वाले दो छात्र संगठनों के बीच हिंसक झड़प में कई छात्र घायल हो गए। दोनों समूहों ने हिंसा के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में किसी भी तरह के अराजक व्यवहार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी। JNU परिसर में सोमवार देर रात करीब 1:30 बजे कुलपति के खिलाफ प्रदर्शन के हिंसक रूप अख्तियार करने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। वामपंथी रुझान वाले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) ने कुलपति शांतिश्री धुलिपुडी पंडित के इस्तीफे और एक निष्कासन आदेश को रद्द करने की मांग को लेकर रविवार रात को पूर्वी गेट की ओर समता जुलूस निकालने का आह्वान किया था।

    प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने मार्च में शामिल छात्रों से संवाद के बजाय अखिल भारतीय विद्यार्थी (ABVP) के सदस्यों को उनसे भिड़ने दिया। हालांकि, एबीवीपी ने आरोपों को खारिज किया और वाम समर्थित संगठनों पर झड़पों को भड़काने तथा घटना के बारे में गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया। कुलपति पंडित ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा था कि समुदाय लगातार पीड़ित बने रहकर या पीड़ित होने का नाटक करके प्रगति नहीं कर सकते, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया। जेएनयूएसयू ने पंडित की टिप्पणियों को जातिवादी और हाशिये पर पड़े समुदायों के प्रति असंवेदनशील बताया है।

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