
चेन्नई । एआईएडीएमके नेता पन्नीरसेल्वम (AIADMK leader Panneerselvam) डीएमके में शामिल हो गए (Joined DMK) । उन्होंने शुक्रवार को मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की मौजूदगी में डीएमके का दामन थामा ।
पन्नीरसेल्वम को एआईएडीएमके के अंदरूनी सत्ता संघर्ष के दौरान पार्टी से बाहर कर दिया गया था। उन्होंने एआईएडीएमके में फिर से शामिल होने के लिए कई बार प्रयास किए, लेकिन पार्टी के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने उनके प्रयासों को अस्वीकार कर दिया था। पन्नीरसेल्वम के डीएमके में शामिल होने पर मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री और प्रिय मित्र ओ. पन्नीरसेल्वम ने अपने मातृ संगठन डीएमके में फिर शामिल हो गए हैं। उनका स्वागत है। द्रविड़ आंदोलन के महान नेता के नाम पर उन्होंने द्रविड़ आंदोलन की नीति ‘काकुम नाम परियकम’ का अनुसरण किया है।
सीएम स्टालिन ने कहा कि 2026 का विधानसभा चुनाव तमिलनाडु और फासीवादी भाजपा के बीच एक लोकतांत्रिक लड़ाई है। इसे समझते हुए विभिन्न लोकतांत्रिक ताकतें संगठन में शामिल हो रही हैं। हमारे साथ जुड़े मित्र ओ. पन्नीरसेल्वम दयालु, विनम्र और शालीन हैं। उन्हें शुभकामनाएं। तमिलनाडु की जीत हो। पिछले साल 31 जुलाई को पदयात्रा के दौरान पन्नीरसेल्वम ने मुख्यमंत्री स्टालिन से मुलाकात की थी। उसी शाम उनके आवास पर जाकर उनका हालचाल पूछा था। इस मुलाकात से राजनीतिक गठबंधन में संभावित बदलाव की अटकलें तेज हो गई थीं। इसके बाद 20 फरवरी को हाल ही में हुए अंतरिम बजट सत्र के अंतिम दिन पन्नीरसेल्वम ने मुख्यमंत्री से दोबारा मुलाकात की, जिससे संभावित बदलाव की अटकलें और भी बढ़ गई थीं।
कई हफ्तों से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए पन्नीरसेल्वम अपने समर्थकों के साथ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के मुख्यालय अन्ना अरिवलयम पहुंचे और औपचारिक रूप से डीएमके की सदस्यता ग्रहण कर ली। मुख्यमंत्री स्टालिन ने पार्टी में उनका स्वागत किया। उनका डीएमके में शामिल होना इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। डीएमके में उनके जाने से एआईएडीएमके के भीतर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है और इससे जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों पर असर पड़ सकता है, खासकर दक्षिणी जिलों में जहां उन्हें काफी समर्थन मिलता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सत्ताधारी डीएमके के रणनीतिक सुदृढ़ीकरण का संकेत है।
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