
तेल अवीव. पश्चिम एशिया (West Asia) में गहराते सैन्य तनाव (Military tensions) के बीच अमेरिका (US) ने इस्राइल (Israel) स्थित अपने दूतावास कर्मियों (embassy staff) को तत्काल देश छोड़ने के लिए कहा है। शुक्रवार को अमेरिकी राजदूत माइक हक्काबी ने कर्मचारियों को भेजे आपातकालीन ईमेल में स्पष्ट किया कि जो भी कर्मचारी स्वेच्छा से जाना चाहते हैं, वे अविलंब प्रस्थान करें। यह कदम ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले और क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के खतरों को देखते हुए उठाया गया है।
राजदूत ने कर्मियों को सचेत किया है कि आगामी दिनों में उड़ानों की उपलब्धता अनिश्चित हो सकती है, इसलिए प्रस्थान के इच्छुक लोग आज ही निर्णय लें। गौरतलब है कि एक दिन पूर्व ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई है, जिसके बाद क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों की तैनाती बढ़ा दी गई है। उधर, ईरान ने भी तैयारी की है। एजेंसी
कई एयरलाइन ने सेवाएं कीं निलंबित
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस हलचल का व्यापक असर दिख रहा है। नीदरलैंड की केएलएम (केएलए) समेत कई एयरलाइंस ने तेल अवीव के लिए अपनी सेवाएं निलंबित कर दी हैं। ऑस्ट्रेलिया ने भी अपने राजनयिकों के परिजनों को इस्राइल छोड़ने का निर्देश दिया है, जबकि भारत और कई यूरोपीय देशों ने अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा न करने की सलाह जारी की है। उधर, यूएई और सऊदी अरब ने अपने वायु क्षेत्र से किसी भी देश की उड़ानों को गुजरने देने की इजाजत पहले ही प्रतिबंधित कर दी है।
अमेरिका-ईरान विवाद में इस्राइल की भूमिका
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू लंबे समय से अमेरिका से ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि अगर ईरान ने हमला किया तो इस्राइल जवाब जरूर देगा। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले हफ्ते इस्राइल का दौरा करेंगे। माना जा रहा है कि यह दौरा आने वाले कदमों को लेकर अहम हो सकता है।
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