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खामेनेई के निधन के बाद ईरान में सत्ता संकट गहराया, सेना में भ्रम; नए सुप्रीम लीडर की जल्द नियुक्ति की मांग तेज

March 01, 2026

नई दिल्ली । ईरान (Iran)के सुप्रीम लीडर (Supreme Leader)अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन (Khamenei’s demise)की पुष्टि के साथ ही इस्लामिक गणतंत्र(Islamic Republic) में अभूतपूर्व राजनीतिक और सैन्य संकट(Military crisis) खड़ा हो गया है। लगभग 47 वर्षों तक सत्ता के सर्वोच्च पद पर रहे खामेनेई के जाने से न केवल नेतृत्व का खालीपन पैदा हुआ है, बल्कि देश की सुरक्षा और कमांड संरचना में भी गंभीर अस्थिरता देखने को मिल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक सेना की चेन ऑफ कमांड के कुछ हिस्से बिखर गए हैं और आदेशों के क्रियान्वयन में तालमेल की कमी सामने आ रही है।

सूत्रों के अनुसार इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने नए सुप्रीम लीडर की नियुक्ति को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। आम तौर पर यह प्रक्रिया संवैधानिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के माध्यम से पूरी होती है, जो नए सर्वोच्च नेता का चुनाव करती है। लेकिन मौजूदा हालात विशेषकर जारी हवाई हमलों और सुरक्षा चुनौतियों के बीच इस संस्था का सत्र बुलाना मुश्किल बताया जा रहा है। ऐसे में खबर है कि IRGC कानूनी प्रक्रिया से हटकर जल्द से जल्द नए नेता को तख्त पर बैठाने के विकल्प पर विचार कर रहा है, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, IRGC का शेष कमांड ढांचा 1 मार्च की सुबह तक नए नेतृत्व पर अंतिम फैसला चाहता है। खामेनेई की मौत के बाद सुरक्षा तंत्र में जो भ्रम पैदा हुआ है, उसने स्थिति को और जटिल बना दिया है। कुछ सैन्य कमांडरों और निचली रैंक के कर्मियों के अपने-अपने ठिकानों पर रिपोर्ट न करने की खबरें भी सामने आई हैं। इससे सैन्य अनुशासन और संकट प्रबंधन की क्षमता पर सवाल उठने लगे हैं। आने वाले घंटों और दिनों में निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे आंतरिक अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।

IRGC को इस बात की भी चिंता है कि नेतृत्व संकट के बीच देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों का नया दौर शुरू हो सकता है। राजनीतिक अनिश्चितता और बाहरी सैन्य दबाव के माहौल में जनता का सड़कों पर उतरना स्थिति को और विस्फोटक बना सकता है।

 


  • इस घटनाक्रम पर अमेरिका की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ईरान पर हालिया हमले विफल कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम थे। अधिकारी के अनुसार अमेरिका ने ईरान को स्थायी रूप से मुफ्त परमाणु ईंधन देने की पेशकश की थी, लेकिन तेहरान यूरेनियम संवर्धन की अपनी क्षमता छोड़ने को तैयार नहीं था। वॉशिंगटन इसे संभावित परमाणु हथियार कार्यक्रम से जोड़कर देखता है। इसके अलावा, ईरान ने क्षेत्रीय उग्रवादी समूहों के समर्थन और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर बातचीत से इनकार कर दिया था।

    खामेनेई के निधन के बाद ईरान एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। क्या देश संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नया सुप्रीम लीडर चुनेगा या IRGC के दबाव में त्वरित और असाधारण निर्णय लिया जाएगा यह आने वाला समय तय करेगा। फिलहाल, सत्ता का यह शून्य और सैन्य तंत्र में फैलता भ्रम न केवल ईरान बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।

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