
नई दिल्ली। अमेरिका (America) और इजरायल (Israel) द्वारा ईरान (Iran) पर किए गए हमलों के बाद मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है और इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार (Global Oil Market) पर दिखने लगा है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें दुबई और अबू धाबी जैसे अहम ठिकानों के साथ कतर, बहरीन, सऊदी अरब और ओमान भी प्रभावित बताए जा रहे हैं। बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम ने ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है।
कीमतों में तेज उछाल
तनाव बढ़ते ही कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड, जो शुक्रवार को 72 डॉलर प्रति बैरल के सात महीने के उच्च स्तर पर बंद हुआ था और 2026 के शुरुआती दो महीनों में करीब 19% चढ़ चुका था, अब 12% की छलांग लगाकर 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।
वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में भी करीब 8% की तेजी आई और यह 70 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया। इजरायल के 12 दिनों तक चले हमलों के बाद पहली बार पिछले साल जून के बाद ब्रेंट 80 डॉलर के स्तर से ऊपर गया है।
सप्लाई पर मंडराता खतरा
तनाव के बीच ईरान की तेल उत्पादन क्षमता पर भी नजरें टिक गई हैं। ईरान ओपेक+ गठबंधन का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक देश है और समूह के कुल उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 12% है। वह प्रतिदिन करीब 3.3 मिलियन बैरल तेल उत्पादन की क्षमता रखता है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 3% है। देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी की क्षमता 5 लाख बैरल प्रतिदिन है। ऐसे में यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का केंद्र
सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जहां से दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति और बड़ी मात्रा में एलएनजी गुजरती है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस मार्ग को बंद करने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन विरोधाभासी खबरों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। ईरान का लगभग 90% तेल निर्यात भी इसी रास्ते चीन जाता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।
OPEC+ का बढ़ा उत्पादन
संकट के बीच ओपेक+ ने अपनी मासिक बैठक में अप्रैल से उत्पादन वृद्धि की रफ्तार तेज करने का फैसला लिया है। समूह के प्रमुख सदस्य सऊदी अरब और रूस अप्रैल से प्रतिदिन 2,06,000 बैरल अतिरिक्त तेल बाजार में उतारेंगे। यह बढ़ोतरी पिछले दिसंबर में घोषित 1,37,000 बैरल प्रतिदिन की वृद्धि से करीब डेढ़ गुना अधिक है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं या होर्मुज मार्ग बाधित होता है, तो तेल 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। हालांकि तनाव कम होने की स्थिति में कीमतें फिर स्थिर हो सकती हैं। फिलहाल, मध्य-पूर्व की जंग ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और महंगाई का नया खतरा पैदा कर दिया है।
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