
इंदौर। गेहूं (Wheat) की नई फसल (new crop) मंडी (market ) में बिकने के लिए एक महीने से आना शुरू हो चुकी है। किसानों (farmers) की नाराजगी इस बात की है कि समर्थन मूल्य से 500 रुपए प्रति क्विंटल या इससे नीचे भी 90 फीसदी सबसे ज्यादा गेहूं बिक रहा है। किसानों का कहना है कि आर्थिक नुकसान हो रहा है। मंडी प्रशासन और अधिकारियों को नीलामी के समय विशेष व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि बोली ठीक से लग पाए।
इंदौर शहर की लक्ष्मीबाई अनाज मंडी और छावनी मंडी में इस समय 5000 बोरी गेहूं की आवक हो रही है। इंदौर मंडी में मिडियम क्वालिटी का गेहूं 2000 से 2100 और हलका माल 1850 रुपए प्रति क्विंटल तक नीचे में बिक रहा है। कुछ 2 से 3 फीसदी गेहूं ही समर्थन मूल्य 2625 रुपए या इससे ऊपर में बिक रहा है। यही हालत धार, देवास, बदनावर या अन्य समस्त मंडियों की भी बनी हुई है। मंडी सचिव ओपी खोड़े ने बताया कि मंडी में पिछले वर्ष से गेहूं के दाम कम चल रहे हैं। अभी 2250 से 2300 रुपए प्रति क्विंटल मॉडल रेट है। अब मंडी में आवक भी बढऩे वाली है। किसान संगठनों ने मांग की है कि समर्थन मूल्य से नीचे गेहूं के दाम नहीं रहना चाहिए, न ही बोली लगाई जाए। मंडी प्रभारी और अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप करें, ताकि किसानों को नुकसान न हो। समर्थन मूल्य पर भी जल्द खरीदी की शुरुआत करने की मांग किसानों द्वारा की जा रही है। किसानों का कहना है कि इस बार गेहूं के दाम पिछले साल के मुकाबले 500 से 800 प्रति क्विंटल कम चल रहे हैं। गत वर्ष औसत गेहूं 2600 से 3000 या इससे ज्यादा में भी बिक रहा था।