
नई दिल्ली:बॉलीवुड की चमकती दुनिया बाहर से जितनी ग्लैमरस (glamorous) दिखाई देती है उतनी ही चुनौतियों (challenges) और संघर्षों (struggles) से भी भरी होती है। कई कलाकार (artists) ऐसे होते हैं जो अपने निजी दर्द और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को छिपाकर लगातार काम करते रहते हैं। ऐसी ही एक कहानी अभिनेत्री Fatima Sana Shaikh की है जिन्होंने हाल ही में अपनी जिंदगी के उस कठिन दौर को याद किया जब वे मिर्गी (epilepsy) के दौरों से जूझ रही थीं।
फातिमा को असली पहचान साल 2016 में आई सुपरहिट फिल्म Dangal से मिली थी। इस फिल्म में उन्होंने पहलवान गीता फोगाट का किरदार निभाया था और उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा था। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म की शूटिंग के दौरान वे एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या से जूझ रही थीं।
हाल ही में अभिनेत्री ने Soha Ali Khan के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान बताया कि दंगल की शूटिंग के दौरान उन्हें अचानक मिर्गी का दौरा पड़ा था। उस समय सेट पर मौजूद लोग समझ ही नहीं पाए कि आखिर उनके साथ हो क्या रहा है। फातिमा ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि सब ठीक हो जाएगा लेकिन धीरे धीरे हालत बिगड़ने लगी।
उन्होंने बताया कि जब उन्हें महसूस हुआ कि दौरा पड़ सकता है तो उन्होंने अपने आसपास मौजूद लोगों को इसकी जानकारी दी। उस समय सेट पर उनके सह कलाकार Aamir Khan, Sanya Malhotra और ट्रेनर कृपा शंकर बिश्नोई मौजूद थे। स्थिति समझने के लिए टीम ने तुरंत इंटरनेट पर जानकारी खोजी और फिर उन्हें एक सुरक्षित जगह पर लिटाकर जरूरी सावधानियां बरतीं।
फातिमा के मुताबिक उस समय पूरी फिल्म की जिम्मेदारी भी उन पर थी इसलिए प्रोडक्शन टीम ने तुरंत मेडिकल जांच कराने का फैसला किया। इसके बाद उन्हें डॉक्टर के पास ले जाया गया जहां उनका MRI और EEG जैसे कई टेस्ट किए गए। बाद में मुंबई के एक न्यूरोलॉजिस्ट से उनका इलाज शुरू हुआ और दौरे को नियंत्रित करने के लिए दवाएं दी गईं।
हालांकि इलाज आसान नहीं था। फातिमा ने बताया कि दवाओं की मात्रा काफी ज्यादा थी जिसके कारण उन्हें कई तरह के साइड इफेक्ट झेलने पड़े। उन्हें अक्सर चक्कर आते थे और सीधे चलना भी मुश्किल हो जाता था। इसके साथ ही उनके मूड में अचानक बदलाव आने लगे थे। कभी उन्हें गहरी उदासी महसूस होती तो कभी गुस्सा आने लगता और कई बार वे खुद को आसपास की दुनिया से बिल्कुल अलग महसूस करती थीं।
सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि दवाओं के असर के कारण उनके लिए फिल्म के लिए जरूरी कड़ी कुश्ती की ट्रेनिंग जारी रखना मुश्किल हो गया था। आखिरकार उन्होंने बिना किसी को बताए दवाएं लेना बंद कर दिया हालांकि उन्हें पता था कि इससे दौरे आने का खतरा बना रहेगा।
फातिमा ने बताया कि इस बीमारी के साथ जीना आसान नहीं था। उन्हें हमेशा डर रहता था कि कहीं लोगों के सामने उन्हें दौरा न पड़ जाए। जब भी उन्हें ऐसा महसूस होता कि दौरा आने वाला है तो वे चुपचाप वहां से हट जातीं और बाथरूम में जाकर दरवाजा बंद कर लेतीं। वहां वे एक करवट लेटकर इंतजार करती थीं जब तक कि दौरा गुजर न जाए।
अभिनेत्री के अनुसार करीब चार साल तक उन्होंने इसी डर और असहजता के साथ जीवन बिताया। आज वे खुलकर अपनी इस बीमारी के बारे में बात करती हैं ताकि लोगों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ सके और कोई भी व्यक्ति इसे छिपाने के बजाय सही इलाज और समर्थन ले सके।
वर्क फ्रंट की बात करें तो खबरों के मुताबिक फातिमा सना शेख जल्द ही फिल्म Nyay में नजर आ सकती हैं। उनकी यह कहानी इस बात का उदाहरण है कि मुश्किल हालात के बावजूद अगर हिम्मत और सहयोग मिले तो इंसान हर चुनौती का सामना कर सकता है।
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