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ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम ने अमेरिका को दी चेतावनी, बोले- हम खून देने को तैयार, लेकिन जमीन नहीं देंगे

March 15, 2026

नई दिल्ली. पश्चिम एशिया (West Asia) में तेज होते टकराव के बीच ईरान (Iran) ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल वह अमेरिका (US) के साथ किसी भी तरह की बातचीत के लिए तैयार नहीं है. भारत (India) में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही (Abdul Majid Hakim) ने कहा कि मौजूदा हालात में वार्ता का कोई सवाल नहीं उठता और यदि स्थिति ऐसी ही बनी रहती है तो ईरान लंबे समय तक युद्ध का सामना करने के लिए भी तैयार है. ANI को दिए एक इंटरव्यू में इलाही ने कहा कि आज भी ईरान की सड़कों पर लोगों में गुस्सा और प्रतिरोध का भाव दिखाई देता है. लोग खुलकर कह रहे हैं कि वे अपने देश की रक्षा के लिए हर बलिदान देने को तैयार हैं, वह कह रहे हैं कि खून दे देंगे, लेकिन अपनी जमीन नहीं देंगे.


  • उनका कहना था कि संघर्ष कितने समय तक चलेगा यह कहना मुश्किल है, लेकिन ईरान अंत तक लड़ने का संकल्प रखता है, भले ही यह लड़ाई कई वर्षों तक क्यों न जारी रहे. ईरान को लंबे युद्धों का अनुभव है. उन्होंने याद दिलाया कि ईरान और इराक के बीच आठ वर्षों तक चला युद्ध देश झेल चुका है. उनके अनुसार

    ‘हम बातचीत के पक्ष में नहीं’
    इलाही ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि तेहरान बातचीत करना चाहता है. उन्होंने कहा कि ईरान इस समय किसी वार्ता की इच्छा नहीं रखता, क्योंकि यह संघर्ष अमेरिका की कार्रवाई के बाद शुरू हुआ. उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में दो बार ऐसी स्थिति बनी जब बातचीत चल रही थी और उसी दौरान ईरान पर हमले किए गए.

    हम विरोधियों के आगे नहीं झुकेंगे
    इलाही के मुताबिक ईरान अपने विरोधियों के दबाव में आने वाला देश नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो ईरान लंबे समय तक संघर्ष जारी रखने की क्षमता रखता है. उन्होंने यह भी दोहराया कि देश पहले भी लंबे युद्धों का सामना कर चुका है, इसलिए वर्तमान परिस्थितियों से निपटने का अनुभव उसके पास मौजूद है.

    वैश्विक स्तर पर भी असर
    उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट केवल ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता इसका उदाहरण है. गैस, पेट्रोल और तेल की आपूर्ति पर भी इस टकराव का प्रभाव दिखाई दे रहा है.

    ईरान ने पहले भी टकराव टालने की कोशिश की
    इलाही ने कहा कि ईरान शुरू से ही क्षेत्र में युद्ध नहीं चाहता था. उन्होंने बताया कि तेहरान ने कई बार पड़ोसी देशों से अपील की थी कि वे मिलकर हालात को बिगड़ने से रोकने की कोशिश करें. उनके अनुसार मध्य पूर्व पहले ही कई संघर्षों से जूझ चुका है और यह इलाका एक और बड़े युद्ध का बोझ नहीं उठा सकता.

    दुनिया से हस्तक्षेप की अपील
    इलाही ने विश्व समुदाय से भी अपील की कि वह स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए अमेरिका पर दबाव बनाए. उन्होंने कहा कि ईरान को दूसरों की परेशानी से कोई खुशी नहीं है, लेकिन देश की स्वतंत्रता, सम्मान और सुरक्षा की रक्षा करना उसकी मजबूरी है.

    फरवरी के अंत में शुरू हुआ था संघर्ष
    पश्चिम एशिया में मौजूदा टकराव की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी. इसके बाद से एक ओर अमेरिका और इजरायल तथा दूसरी ओर ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया. अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद हालात और ज्यादा गंभीर हो गए.

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