
नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में रिश्तों और सियासी समीकरणों(Political equations) का दिलचस्प संगम देखने को मिला है, जहां सुप्रिया सुले(Supriya Sule) ने बारामती विधानसभा उपचुनाव (Assembly By-election) को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए अपनी ही भाभी सुनेत्रा पवार(Sunetra Pawar) के खिलाफ उम्मीदवार न उतारने की घोषणा की है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(Nationalist Congress Party) शरदचंद्र पवार की कार्यकारी अध्यक्ष सुले ने साफ कहा कि उनकी पार्टी इस चुनाव में भाग नहीं लेगी और पारिवारिक रिश्तों को प्राथमिकता देते हुए सुनेत्रा पवार को वॉकओवर दिया जाएगा।
निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार पुणे जिले की बारामती और अहिल्यानगर की राहुरी विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को उपचुनाव होने हैं। बारामती सीट पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के कारण खाली हुई है, जबकि राहुरी सीट भाजपा विधायक शिवाजी कर्डिले के निधन के चलते रिक्त हुई। बारामती से सुनेत्रा पवार के चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह मुकाबला खासा चर्चा में था, लेकिन सुले के इस फैसले ने सियासी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।
दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में सुले ने कहा कि उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उनकी पार्टी बारामती उपचुनाव नहीं लड़ेगी। उन्होंने सुनेत्रा पवार को ‘वहिनी’ कहकर संबोधित करते हुए पारिवारिक सम्मान को अहम बताया। हालांकि राहुरी सीट को लेकर महा विकास आघाडी के सहयोगी दलों के बीच विचार-विमर्श जारी है और जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।
इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी संकेत दिए हैं कि इन उपचुनावों को निर्विरोध कराने के प्रयास किए जाएंगे, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मुकाबला होता है तो भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह तैयार है। इससे यह साफ है कि राज्य की राजनीति में सहमति और प्रतिस्पर्धा दोनों की संभावनाएं बनी हुई हैं।
गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सुप्रिया सुले ने बारामती सीट पर सुनेत्रा पवार को हराकर अपनी पकड़ बरकरार रखी थी। इसके बाद सुनेत्रा पवार राज्यसभा सदस्य बनीं। इसी वर्ष जनवरी में बारामती के पास एक विमान दुर्घटना में अजित पवार और अन्य लोगों की मौत के बाद राजनीतिक हालात तेजी से बदले और सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री तथा पार्टी की जिम्मेदारी सौंपी गई।
सुले ने अजित पवार की मौत से जुड़े विमान हादसे की पारदर्शी जांच की भी मांग की है। साथ ही उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच एलपीजी संकट को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए और एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए, क्योंकि इसका असर आम लोगों से लेकर उद्योगों तक पर पड़ रहा है।
कुल मिलाकर, बारामती उपचुनाव में यह फैसला जहां पारिवारिक रिश्तों को प्राथमिकता देने का संकेत देता है, वहीं महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई तरह की सॉफ्ट पॉलिटिक्स की झलक भी पेश करता है।
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