
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में युद्ध और होर्मुज जलसंधि (Hormuz Strait) में रुकावट के कारण भारत (India) में तेल-गैस संकट (Oil and Gas Crisis) और बढ़ गया है। इस संकट का असर अब दूसरे क्षेत्रों पर भी देखने को मिल रहा है। एलपीजी (LPG) की कमी के साथ-साथ एलएनजी की वैश्विक आपूर्ति बाधित होने से देश में यूरिया (Urea) की उपलब्धता पर भी संकट मंडराने लगा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज तनाव के कारण देश के यूरिया संयंत्रों में उत्पादन में लगभग 50 प्रतिशत की कटौती की गई है।
यूरिया उत्पादन में आधी कटौती
सूत्रों के मुताबिक, होर्मुज जलसंधि के माध्यम से एलएनजी की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण ईंधन की कमी आई है। इसके चलते भारतीय यूरिया संयंत्रों ने अपने उत्पादन को लगभग आधा घटा दिया है। माल ढुलाई में रुकावट के कारण सप्लायर्स ने फोर्स मेज्योर का हवाला दिया और पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड को भी अपने रिसीविंग टर्मिनल पर इसी तरह कदम उठाना पड़ा।
सप्लाई चेन पर असर
गैस की कमी का असर तुरंत सप्लाई चेन पर दिखा। GAIL इंडिया लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने रासगैस अनुबंध के तहत संचालित यूरिया संयंत्रों को गैस की सप्लाई कम कर दी।
कम उत्पादन और वित्तीय नुकसान
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गैस की सप्लाई सामान्य स्तर की तुलना में 60-65 प्रतिशत तक घट गई है। इसके कारण संयंत्रों ने यूरिया उत्पादन में लगभग आधी कटौती की है। प्लांट मैनेजर के अनुसार, इन परिस्थितियों में उत्पादन का मतलब है कि कम यूरिया बनाने के लिए अधिक ऊर्जा खर्च करना पड़ रहा है, जिससे सीधे वित्तीय नुकसान हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अचानक लोड परिवर्तन बड़े यूरिया संयंत्रों के लिए संभव नहीं है, जिससे उपकरण खराब होने, प्लांट ठप होने और कर्मियों की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ जाता है।
देश में यूरिया का भंडार
भारत दुनिया के सबसे बड़े यूरिया उपभोक्ताओं में से एक है। लंबे समय तक यह व्यवधान रहने से खरीफ की बुवाई के पहले यूरिया की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। 19 मार्च 2026 तक देश में यूरिया का भंडार 61.14 लाख टन था, जबकि पिछले साल इसी समय यह 55.22 लाख टन था। इस आंकड़े के कारण फिलहाल कुछ राहत जरूर मिल रही है।
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