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ये पॉलिटिक्स है प्यारे

March 23, 2026

मामा को महंगा पड़ गया शौक
एमआईसी मेम्बर (MIC Member) मनीष मामा (Manisa mama) को नाचने-गाने का शौक उस वक्त महंगा पड़ गया, जब वे सोशल मीडिया (Social Media) पर ट्रोल हो गए। बात छोटी-सी थी, लेकिन कांगे्रस ने कुछ इस तरह से जाल बुना कि मामा अब सफाई देते फिर रहे हैं कि घटना सुबह की है और मैं तो रात को नाचा था। मामा के नाच पर विधायक गोलू शुक्ला, नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने भी खूब तालियां बजाईं, लेकिन उन्हें भी नहीं मालूम था कि मामा का ये शौक उनके भी ट्रोल होने का कारण बन जाएगा। वैसे संगठन ने सफाई दी कि इस प्रकार के प्रशिक्षण वर्ग में सब अपनी प्रतिभा दिखाते हैं। अब मामा में नाचने-गाने की प्रतिभा है तो उन्हें कौन रोक सकता है? खैर अब सफाई देने से तो कोई मतलब नहीं मामा…जो होना था सो हो गया और वो कहते हैं ना…अब पछताए होत क्या जब चिडिय़ा चुग गई खेत।

पार्षद को झेलना पड़ा अपनों का विरोध
भाजपा की पार्षद संगीता जोशी के पति महेश जोशी को अपने ही दल के लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ा । जोशी का विरोध बजरंग दल वालों ने इसलिए किया कि उन्होंने कुछ लोगों की दुकानें तुड़वा दी थीं। अब दुकानें जोशी ने तुड़वार्ई या निगम के अधिकारियों को हुई शिकायत के आधार पर दुकानें तोड़ी गईं। बजरंग दल वालों का कहना था कि कार्रवाई हो तो एक समान हो। वैसे भी दुकानें निजी जमीन पर थीं और यहां सडक़ पर ही कई दुकानें लगी हैं, जिस पर पार्षद के समर्थकों का हाथ है। खबर तो और भी कुछ सुनने में आ रही है कि पार्षद पति का अभयदान इन्हें किसी न किसी कारण से मिला हुआ है।

आखिर क्यों नदारद रहे मुस्लिम पार्षद?
एमओएस पर लगने वाले टैक्स को लेकर चिंटू चौकसे ने हल्ला बोल दिया है और पहली बार में वे निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल से मिल आए हैं। यहां तक तो ठीक है, लेकिन सिंघल से मुलाकात के दौरान उनके साथ कांग्रेस के आधे ही पार्षद थे। जानकारी ली तो मालूम चला कि मुस्लिम पार्षद नहीं आए हैं, क्योंकि रमजान माह चल रहा है। कांग्रेसी बोलते रहे कि रोजा तो शाम को खोलना है, लेकिन फिर भी पार्षदों की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय रही कि शहरहित में एक भी मुस्लिम पार्षद ने अपने ही नेता की आवाज बुलंद नहीं की। यही कारण है कि कांग्रेस जनहित के मोर्चे पर एक नहीं हो पाती है और उसका फायदा भाजपा को मिलता है।


  • सुमित को भी गुस्सा आता है…
    भाजपा के नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा को गुस्सा कम आता है, लेकिन जब आता है तो वे किसी की नहीं सुनते। पिछले सप्ताह जब मुख्यमंत्री मोहन यादव इंदौर आने वाले थे, तब एयरपोर्ट पर मिलने वालों की लिस्ट पुलिस फाइनल कर रही थी और एक अधिकारी ने शर्त रख दी कि केवल 15 लोगों को नगर भाजपा की ओर से अनुमति मिलेगी। फिर क्या था सुमित का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया और उन्होंने अपनी स्टाइल में अधिकारी को खरी-खोटी सुना दी और कहा कि आप लोग ऐनवक्त पर किसी को भी अंदर कर देते हो और हमारे कार्यकर्ता को रोक रहे हो, ऐसा नहीं चलेगा। जैसी प्रथा पहले से आ रही है, वैसी ही चलेगी। अब अधिकारी के सामने चुप रहने के अलावा कोई चारा भी नहीं था। बात समझ में नहीं आई कि साब नए थे या साब को एयरपोर्ट की जवाबदारी पहली बार मिली थी।

    चुनाव लड़ेंगे या पार्टी का काम करेंगे
    अपनी कार्यकारिणी की घोषणा के पहले चिंटू चौकसे ने कहा था कि कार्यकारिणी में उन्हीं लोगों को रखा जाएगा, जो नगर निगम चुनाव नहीं लडऩा चाहते हैं। अब कार्यकारिणी घोषित हो गई, लेकिन उसमें कुछ नाम ऐसे आ गए हैं, जिनके सुर बदल गए हैं और वे चुनाव लडऩे की इच्छा भी रखते हैं। फिलहाल तो वे चुप हैं, लेकिन चिंटू ने कहा है कि अगर चुनाव लडऩा है तो वे इस्तीफा दे दें, ताकि किसी दूसरे को मौका मिल सके। इसके बाद अब कितने कांग्रेसियों का विवेक जागता है, ये तो आने वाला समय ही बताएगा।

    महिला नेत्री की हेलीकाप्टर एंट्री
    प्रदेश कार्यकारिणी में आने की आस लगाए बैठी महिला नेत्रियों को एक नियुक्ति पच नहीं पा रही है। वह नियुक्ति है निधि बंग की, जिन्हें कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इंदौर से ली गई तीन महिलाओं में एक सुधा सुख्यानी तो लंबे समय से सक्रिय हैं, वहीं शिवानी अड़सपुरकर के पति भी भाजपा में लंबे समय से जमे हुए हैं। अब निधि की एंट्री को लेकर कहा जा रहा है कि उन्हें हेलीकाप्टर से उतारा गया है और पार्टी में सक्रिय रहने वाली कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया। कल इसकी चर्चा खूब रही।

    तू डाल-डाल तो मैं पात-पात
    हर मोर्चे पर सक्रिय रहने वाले देवेन्द्रसिंह यादव अब कांग्रेस के समानांतर ही अपनी राजीव विकास केन्द्र की कार्यकारिणी गठित कर रहे हैं। चिंटू चौकसे की कार्यकारिणी क्या आई कि देवेन्द्र ने अपनी भी कार्यकारिणी गठित कर दी। चिंटू ने महिलाओं को नहीं लिया तो देवेन्द्र ने ऐसी कार्यकारिणी बना दी, जिसमें महिलाओं को खासी तवज्जो देकर बताया कि मैंने सही किया है। एक तरह से देवेन्द्र ने अघेषित रूप से चिंटू को बताने में कसर नहीं छोड़ी कि आपकी गलती मैं सुधार रहा हूं और पुराने लोगों को पद दे रहा हूं। अब चिंटू क्या करें, उन्हें तो सृजन अभियान के तहत अपनी कार्यकारिणी घोषित करना थी सो कर दी। वैसे देवेन्द्र का ये स्टाइल आज का नहीं बरसो पुराना है।

    आखिर ऐसा क्या है कि युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर का दौरा ऐनवक्त पर निरस्त हो जाता है। पहले युवा संवाद में आने वाले थे और आज मशाल रैली में, लेकिन एक बार फिर भोपाल में जरूरी बैठक का कारण सामने आ गया। लगता है बुलाने वाले टेलर का ठीक से मुहूर्त नहीं निकलवाते। -संजीव मालवीय

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