
प्योंगयांग। उत्तर कोरिया (North Korea) के नेता किम जोंग उन (Kim Jong Un) ने संसद में अपने संबोधन के दौरान देश की परमाणु नीति को और सख्त करने का संकेत दिया है। उन्होंने अमेरिका (America) और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि उत्तर कोरिया एक स्थायी परमाणु शक्ति है और इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा।
परमाणु ताकत को बताया स्थायी रणनीति
सुप्रीम पीपुल्स असेंबली में दिए गए भाषण में किम ने कहा कि देश का भविष्य परमाणु शक्ति बनाए रखते हुए विकास की राह पर आगे बढ़ने में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु बलों को लगातार मजबूत करता रहेगा।
‘परमाणु हथियारों पर कोई समझौता नहीं’
किम जोंग उन ने परमाणु निरस्त्रीकरण के बदले आर्थिक सहायता या सुरक्षा गारंटी जैसे प्रस्तावों को खारिज कर दिया। उनका कहना है कि परमाणु हथियारों की वजह से युद्ध टला है और देश को आर्थिक विकास और लोगों के जीवन स्तर सुधारने पर ध्यान देने का मौका मिला है।
अमेरिका पर लगाए आरोप
उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास सामरिक परमाणु संसाधन तैनात कर क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया। हालांकि, किम ने यह भी कहा कि अब उत्तर कोरिया खुद को सुरक्षित महसूस करता है और जरूरत पड़ने पर जवाब देने में सक्षम है।
दक्षिण कोरिया को बताया ‘सबसे बड़ा दुश्मन’
किम ने दक्षिण कोरिया के साथ शांतिपूर्ण पुनर्मिलन की पुरानी नीति को खत्म करते हुए उसे सबसे बड़ा दुश्मन घोषित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि देश की संप्रभुता को चुनौती दी गई, तो जवाब “बेरहमी” से दिया जाएगा।
रक्षा बजट में बढ़ोतरी
सरकार ने 2026 के बजट में रक्षा खर्च को बढ़ाकर कुल बजट का 15.8% कर दिया है, जिससे सैन्य और परमाणु क्षमताओं को और मजबूत करने की योजना है।
नई पंचवर्षीय आर्थिक योजना पर जोर
सुरक्षा के साथ-साथ किम ने नई पंचवर्षीय विकास योजना भी पेश की। इसमें उद्योगों के आधुनिकीकरण, बिजली और कोयला उत्पादन बढ़ाने और बड़े स्तर पर आवास निर्माण पर फोकस किया गया है।
रूस के साथ बढ़ती साझेदारी
संसदीय सत्र के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का संदेश भी पढ़ा गया, जिसमें मॉस्को और प्योंगयांग के बीच रणनीतिक संबंध मजबूत करने की बात कही गई।
आर्थिक चुनौतियां बरकरार
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर कोरिया अभी भी दुनिया के गरीब देशों में शामिल है। कड़े प्रतिबंधों और संसाधनों की कमी के चलते वहां की बड़ी आबादी सरकारी राशन और अनौपचारिक बाजारों पर निर्भर है।
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