
चेन्नई। तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के एक गांव में रहने वाले 50 से ज्यादा परिवारों ने आने वाले विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है। इन लोगों का कहना है कि वे पिछले 16 वर्षों से बिना बिजली, पानी और शौचालय के नर्क जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं, लेकिन शासन-प्रशासन कोई भी इन लोगों पर ध्यान नही दे रहा है। उन्होंने कहा हर चुनाव के दौरान लोग उनसे वोट मांगने तो आते हैं पार्टियां वादे करती है, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद कोई भी उनके समस्यों का हल नही करता।
यहां स्थानीय निवासी थंगराज ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि जिस जगह वे रह रहे हैं, उसे नंदावनम कहते हैं। करीब 16 साल पहले ये सभी लोग नेशनल हाईवे के किनारे रहते थे। जब हाईवे को चौड़ा करने का काम शुरू हुआ, तो उस समय की सरकार ने उन्हें इस जगह पर लाकर बसा दिया। थंगराज का आरोप है कि यहां बसाने के बाद सरकार उन्हें पूरी तरह भूल गई। इन 16 वर्षों में तमिलनाडु में 4 मुख्यमंत्री आए और चले गए, लेकिन किसी ने भी उनकी सुध नहीं ली। वो बतातें है कि यहां के लोग जिंदगी के लिए जरूरी बुनियादी चीजें, जैसे बिजली या पानी के लिए भी मौहताज है।
एक अन्य निवासी सरोजा ने बताया कि वे लोग वर्षों से कच्ची झोपड़ियों में रह रहे हैं। यहां शौचालय तक की सुविधा नहीं है। हर चुनाव के समय राजनीतिक दल आते हैं और बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई भी वादा पूरा नहीं करता। बिजली न होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी बारिश के दिनों में होती है। अंधेरे की वजह से सांप और अन्य जहरीले जीव अक्सर घरों में घुस जाते हैं। रोशनी की कमी के कारण यहां रहने वालों की जान हमेशा खतरे में रहती है।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर तमिलनाडु सरकार को कई बार प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। सरकार की इसी अनदेखी से परेशान होकर अब इन परिवारों ने कड़ा कदम उठाया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार उन्हें बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं देती, वे चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे और किसी भी पार्टी को वोट नहीं देंगे।
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