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310 एकड़ की आधुनिक अनाज मंडी और ट्रांसपोर्ट नगर प्रोजेक्ट सेबाहर हुआ प्राधिकरण

April 06, 2026

  • योजना में शामिल वन विभाग की जमीन भी नहीं मिल सकी, अब मंडी बोर्ड ही अमल में लाएगा प्रस्तावित प्रोजेक्ट
  • कंसल्टेंसी पर जो साढ़े 9 लाख रुपए खर्च हुए वह मंडी से मांगा

इंदौर। छावनी (Cantonment) स्थित पुरानी अनाज मंडी (Grain Market) को हटाने और उसकी जगह मोरोद माचल (Morod Machal) में लगभग 310 एकड़ (310-Acre) जमीन पर आधुनिक मंडी (Modern Market) और ट्रांसपोर्ट नगर का प्रोजेक्ट तैयार किया गया, जो कि इंदौर विकास प्राधिकरण के माध्यम से अमल में लाया जाना था। मगर अब प्राधिकरण अब इस पूरे प्रोजेक्ट से बाहर हो गया है और मंडी बोर्ड ही इस पर काम करेगा। आधी से अधिक इस प्रोजेक्ट मेंशामिल जमीन वन विभाग की है। उसकी भी एनओसी नहीं मिल पाई। हालांकि वन विभाग को अन्य जिलों में इससे अधिक जमीन देने का प्रस्ताव भी कलेक्टर ने तैयार करवाया। प्राधिकरण ने इस प्रोजेक्ट की कंसल्टेंसी पर लगभग साढ़े 9 लाख रुपए की राशि खर्च भी की, जो कि उसने अब मंडी बोर्ड से ही मांगी है। प्राधिकरण को नई अनाज मंडी विकसित करने के एवज में छावनी की पुरानी अनाज मंडी की जमीन सौंपने और उसके व्यवसायिक उपयोग का निर्णय भी लिया गया था।


  • अभी प्राधिकरण बोर्ड की जो बजट बैठक हुई उसमें मंडी से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय भी शामिल किया गया, जिसमें बोर्ड में बताया गया कि पूर्व में प्राधिकरण संचालक मंडल ने संकल्प क्रमांक 82, दिनांक 19.06.2024 के जरिए निर्णय लिया था कि शहर में जो छावनी क्षेत्र में अनाज मंडी है उसकी जगह भी कम है और बाहरी माल वाहनों के आवागमन, यातायात जाम, प्रदूषण से लेकर कई तरह की समस्याएं रहती है, जिसके चलते इंदौर-खंडवा के 60 मीटर चौड़े रोड पर मात्र डेढ़ किलोमीटर अंदर मोरोद की सरकारी जमीन, जिसका खसरा नम्बर 373/1 है और रकबा लगभग 125 हेक्टेयर यानी 310 एकड़ होता है, उस पर अत्याधुनिक अनाज मंडी और ट्रांसपोर्ट नगर का प्रोजेक्ट तैयार किया गया। इसके एवज में छावनी मंडी की जमीन प्राधिकरण को हस्तांतरित करने का भी निर्णय हुआ, जिसमें कहा गया कि वाणिज्यिक उपयोग प्राधिकरण कर मंडी विकसित करने की राशि एड्जस्ट कर सकेगा। मोरोज में प्रस्तावित प्रोजेक्ट में शामिल जमीन का भू-उपयोग कृषि से मंडी और ट्रांसपोर्ट करने के लिए भी शासन को पत्र लिखने और जो वन भूमि उसमें आ रही है, उसके लिए वन विभाग की एनओसी भी ली जाना थी। इस संकल्प के चलते प्राधिकरण ने सर्वेक्षण और डीपीआर तैयार करने के लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति भी कर दी और सालिस कंसल्टेंट को इसका जिम्मा भी सौंपा गया, जिस पर प्राधिकरण ने लगभग साढ़े 9 लाख रुपए खर्च किए। यह राशि प्राधिकरण ने कंसल्टेंट को स्टेज-2 तक काम करने के भुगतान के रूप में सौंपी। वहीं इस प्रोजेक्ट में77 हेक्टेयर वन भूमि भी मौजूद है, जिसे लेने और उसके बदले में वन विभाग को जमीन आबंटित करने को लेकर भी कलेक्टर बुरहानपुर और कलेक्टर झाबुआ को पत्र भेजे गए। मगर दोनों ही जिलों में जमीन नहीं मिल सकी। नतीजतन प्राधिकरण भी इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं कर पाया और कुछ समय पूर्व मंडी सचिव कुमार पुरुषोत्तम से भी इस संबंध में प्रशासन की चर्चा हुई, तो उन्होंने इस प्रोजेक्ट को विभाग के स्तर पर ही क्रियान्वित करने की सहमति दे दी। यानि यह तय किया गया कि मोरोद में जो आधुनिक मंडी और ट्रांसपोर्ट नगर विकसित होगा उसका काम अब मंडी बोर्ड ही करेगा और प्राधिकरण ने कंसल्टेंट को जो राशि दी है उसका भुगतान भी मंडी प्रशासन से हासिल किया जाएगा। कुल मिलाकर आधुनिक मंडी और ट्रांसपोर्ट नगर का प्रोजेक्ट फिलहाल तो ठंडे बस्ते में ही पड़ा है और अब देखना यह है कि मंडी बोर्ड इस पर क्या निर्णय लेता है।

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