
फायर सेफ्टी की मॉक ड्रिल में दो लिकेज ने बिगाड़ी थी बात
इंदौर। सुधारीकरण (Reformation) के बाद जांच हुई कि पानी (Water) की पहुंच कहां-कहां तक, कितनी आग बुझा सकता है। नजीर को मिली थी फटकार। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि 2014 के बाद से फायर सेफ्टी (Fire Safety) उपकरणों का इस्तेमाल ही नहीं हुआ। जब से लगाए गए हैं तब से सिर्फ मेंटेनेंस हुआ है, बाकी उपयोग में नहीं आने के कारण कई पाइप कमजोर हो गए हैं, जिनका सुधार कार्य किया गया है। ज्ञात हो कि पूर्व अपर कलेक्टर सपना लोवंशी ने भी अपने कार्यकाल में फायर सेफ्टी के उपकरणों के कई पाइप बदले थे, जो इस्तेमाल में नहीं आने के कारण जंग लगकर सड़ चुके थे।
2014 से लगा, इस्तेमाल में नहीं आया
अपर कलेक्टर रोशन राय के अनुसार 2014 के बाद से फायर सेफ्टी उपकरणों का उपयोग केवल मेंटेनेंस तक सीमित रहा है। नियमित प्रेक्टिकल उपयोग न होने के कारण कई पाइप अंदर से जंग खाकर पतले हो चुके थे। यही वजह है कि मॉकड्रिल के दौरान लीकेज की स्थिति बनी। गौरतलब है कि पूर्व में भी तत्कालीन अपर कलेक्टर सपना लोवंशी ने इसी समस्या को देखते हुए कई पाइप बदलवाए थे। प्रशासन का कहना है कि अब पूरे सिस्टम को अपडेट कर दिया गया है और अगली मॉकड्रिल में किसी भी तरह की बाधा न आए, इसके लिए नियमित जांच की रूपरेखा भी बनाई जा रही है।
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