
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ब्रीच ऑफ प्रिविलेज’ यानी विशेषाधिकार हनन का मामला एक बार फिर गरमा गया है। स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा की ओर से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर की गई टिप्पणी और पैरोडी गाने को लेकर मचे घमासान के बीच अब शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने बड़ा बयान दिया है। संजय राउत ने कहा कि कुणाल कामरा ने जो किया वह पैरोडी है, न कि अपमान या पवित्रता भंग करना। राउत ने सत्ता पक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार को कला और अपराध के बीच का महीन अंतर समझना चाहिए।
दरअसल, कुणाल कामरा ने पिछले साल मुंबई में एक शो के दौरान फिल्म ‘दिल तो पागल है’ के एक गाने में बदलाव कर महाराष्ट्र में हुए सत्ता परिवर्तन पर कटाक्ष किया था। इस पैरोडी के जरिए उन्होंने जून 2022 में शिवसेना में हुई बगावत और महा विकास अघाड़ी सरकार के गिरने पर निशाना साधा था। बाद में भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर की शिकायत पर इस मामले को विशेषाधिकार समिति को सौंपा गया। गुरुवार को कामरा विशेषाधिकार समिति के सामने पेश हुए, जहां उन्होंने साफ कर दिया कि उन्हें अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है और न ही वे माफी मांगेंगे।
संजय राउत ने कामरा का बचाव करते हुए महाराष्ट्र के दिग्गज साहित्यकार और पत्रकार प्रह्लाद केशव अत्रे का जिक्र किया। राउत ने कहा कि कुणाल कामरा एक बेहतरीन लेखक और व्यंग्यकार हैं। महाराष्ट्र में आचार्य अत्रे ने भी इसी तरह की पैरोडी और कटाक्ष के जरिए समाज और राजनीति को आईना दिखाया था। कामरा भी वही कर रहे हैं। राउत ने आगे कहा कि विशेषाधिकार समिति जैसे महत्वपूर्ण मंच का इस्तेमाल छोटे-मोटे कॉमेडी वीडियो या व्यंग्य के लिए करना संसाधनों की बर्बादी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने का हक है, खासकर जब वह व्यंग्य के माध्यम से हो।
कामरा का यह मामला अब अभिव्यक्ति की आजादी बनाम राजनीतिक मर्यादा की बहस में तब्दील हो चुका है। जहां एक तरफ भाजपा और शिंदे गुट इसे मुख्यमंत्री और सदन का अपमान बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे सत्ता की तानाशाही और असहमति की आवाज दबाने की कोशिश करार दे रहा है।
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