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FIIs की बेरुखी से कांपा शेयर बाजार! 40 दिन में निकाले 1.66 लाख करोड़

April 11, 2026

नई दिल्ली: विदेशी निवेशकों की बेरुखी कम होने का नाम नहीं ले रही है. मार्च के बाद अब अप्रैल में भी विदेशी निवेशक शेयर बाजार से अपना पैसा निकालने में तुले हुए हैं. वो भी तब जब अमेरिका ने ईरान के साथ अपने वॉर को हल्का करने के लिए सीजफायर का ऐलान किया है. खास बात तो ये है कि FIIs ने अप्रैल में अब तक 48,213 करोड़ रुपए के घरेलू शेयर बेचे हैं. जबकि बीते 40 दिनों में ये आंकड़ा 1.66 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है. अगर बात मौजूदा साल की करें तो विदेशी निवेशक 1.79 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की बिकवाली कर चुके हैं.

अगर बात शुक्रवार की करें तो विदेशी निवेशकों ने 672.09 करोड़ रुपए के घरेलू शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) 410.05 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार रहे. इससे गुरुवार की सुस्ती के बाद, बाजारों को दिन के अंत में अच्छी बढ़त के साथ बंद होने में मदद मिली. सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बाजार में बैंकों, ऑटो और कंज्यूमर शेयरों का दबदबा रहा. निफ्टी 275.50 अंक या 1.16 फीसदी बढ़कर 24,050.60 पर बंद हुआ. वहीं, सेंसेक्स 918.60 अंक या 1.20 फीसदी बढ़कर 77,550.25 पर बंद हुआ.


  • जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता के नतीजों से बाजारों की दिशा तय होगी, जो मुख्य रूप से FPIs की बिकवाली के कारण दबाव में रहे हैं. ऐसा लगता है कि FPIs भारत में बिकवाली करने और अपना पैसा दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे अन्य बाजारों में लगाने पर आमादा हैं, जहां 2026 में कमाई में बढ़ोतरी की संभावनाएं कहीं अधिक बेहतर हैं. उन्होंने कहा कि बाजार शनिवार को होने वाली अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के नतीजों का इंतजार करेगा.

    डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा शांति वार्ता के नतीजों से कच्चे तेल की कीमतों का रुख तय होगा, जो बदले में बाजार के रुझानों को निर्धारित करेगा. यदि वार्ता से संघर्ष में कमी आती है और कच्चे तेल की कीमतें नीचे आती हैं, तो बाजार—विशेष रूप से भारत जैसे बाजार जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं—वापस तेजी पकड़ेंगे. यदि शांति वार्ता विफल हो जाती है और कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ जाती हैं, तो इसका उल्टा होगा. उन्होंने बताया कि इस चुनौतीपूर्ण बाजार माहौल में भी कई शेयर 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर या सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंच रहे हैं.

    मार्च में युद्ध के कारण हुई बिकवाली ने इसे इस साल का सबसे खराब महीना बना दिया, जिसमें 1,17,775 करोड़ रुपए की भारी निकासी देखी गई. विदेशी निवेशक फरवरी में शुद्ध खरीदार बन गए, और अब तक घरेलू बाज़ारों में 22,615 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे हैं. जनवरी में, उन्होंने 35,962 करोड़ रुपए के शेयर बेचे थे. 2025 में, FIIs की खरीदारी के रुझान अस्थिर रहे, लेकिन कुल मिलाकर रुझान मंदी का था. उन्होंने भारतीय बाज़ारों से 1,66,286 करोड़ रुपए निकाल लिए, क्योंकि व्यापार सौदे में देरी और प्रीमियम वैल्यूएशन ने निवेशकों के मनोबल पर दबाव डाला.

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