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देश में ISI से जुड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश, 53 खातों में हुई विदेशी फंडिंग, अब एनआईए करेगी जांच

April 15, 2026

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गाजियाबाद (Ghaziabad) के कौशांबी इलाके से पकड़े गए आईएसआई (ISI) से जुड़े जासूसी नेटवर्क (Spy Network) का मामला अब और गंभीर हो गया है। जांच में बड़े पैमाने पर विदेशी फंडिंग के सबूत मिलने के बाद इस केस को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा गया है।

जांच में हुआ ये खुलासा
स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की जांच में खुलासा हुआ है कि इस नेटवर्क से जुड़े लोगों के 53 बैंक खातों में करीब 1.27 करोड़ रुपये विदेश से ट्रांसफर किए गए। ये खाते पंजाब, पश्चिम बंगाल और बिहार में संचालित हो रहे थे। सबसे ज्यादा रकम बिहार के भागलपुर से जुड़े एक खाते में जमा की गई।

जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। सोनीपत रेलवे स्टेशन पर लगे कैमरे के जरिए ट्रेनों की आवाजाही की लगभग आठ घंटे की रिकॉर्डिंग तैयार कर इसे पाकिस्तान भेजा गया। विशेषज्ञों ने इस वीडियो ट्रांसमिशन की पुष्टि की है, जिससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।


  • जासूसी नेटवर्क का अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
    इस जासूसी नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी सामने आए हैं। इसके तार पाकिस्तान के अलावा यूके, मलेशिया और सऊदी अरब तक जुड़े पाए गए हैं। शुरुआत में इस मामले की एफआईआर कौशांबी थाने में दर्ज की गई थी, जिसके बाद एसआईटी, खुफिया एजेंसियों और अन्य सुरक्षा संगठनों ने संयुक्त रूप से जांच की।

    29 संदिग्धों को हिरासत में लिया
    अब तक गाजियाबाद और हापुड़ से 29 संदिग्धों को हिरासत में लिया जा चुका है, जिनमें छह नाबालिग भी शामिल हैं। इस पूरे मामले का खुलासा 14 मार्च को सुहैल मलिक और साने इरम सहित कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद हुआ था। इसके बाद 20 और 21 मार्च को कई और लोगों को पकड़ा गया, जबकि 24 मार्च को दिल्ली, शामली और कौशांबी से तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

    नेटवर्क की शुरुआत सोशल मीडिया के जरिए
    जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क की शुरुआत सोशल मीडिया के जरिए हुई। मुख्य आरोपी समीर उर्फ शूटर ने 2023 में हथियारों के साथ अपने फोटो और वीडियो पोस्ट किए थे। इन्हें देखकर सुहैल मलिक और नौशाद अली ने उससे संपर्क किया। इसके बाद उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर पाकिस्तान में बैठे सरफराज के निर्देश पर अलग-अलग काम दिए जाने लगे।

    एजेंसियों के अनुसार, यह जासूसी नेटवर्क पिछले करीब दो साल से सक्रिय था और देश के संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाकर बड़ी साजिश की तैयारी कर रहा था। आरोपियों के मोबाइल फोन से कई संदिग्ध चैट, फोटो और वीडियो बरामद हुए हैं, जिनकी जांच जारी है। डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने बताया कि, मनी ट्रेल और डिजिटल सबूतों की जांच अभी भी चल रही है। विदेशी फंडिंग के कई अहम सुराग मिले हैं, जिसके चलते अब इस पूरे मामले की विस्तृत जांच एनआईए द्वारा की जाएगी।

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