
जबलपुर। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने शहर की पारेषण व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) स्थित 132 केवी सबस्टेशन की रिमॉडलिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। वर्ष 1971 में स्थापित हुआ यह सब-स्टेशन करीब 54 साल पुराना है, जिसमें वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए बड़े तकनीकी सुधार किए गए हैं। इस आधुनिकीकरण से न केवल डिफेंस सेक्टर को मिलने वाली बिजली आपूर्ति अधिक सुदृढ़ होगी, बल्कि जबलपुर शहर के बड़े हिस्से को मिलने वाली विद्युत सेवा की गुणवत्ता में भी व्यापक सुधार होगा।
तकनीकी बाधाएं दूर,सिस्टम अपग्रेड
इस सबस्टेशन में अब तक एकल नियंत्रण प्रणाली (सिंगल कंट्रोल सिस्टम) लागू थी, जो तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण हो चुकी थी। पूर्व में पावर ट्रांसफार्मर या लाइनों में कोई भी सुधार कार्य करने के लिए बड़े स्तर पर शटडाउन लेना पड़ता था, क्योंकि एक खराबी का असर पूरे सिस्टम पर पड़ता था। इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए अधीक्षण अभियंता आरसी शर्मा के नेतृत्व में इसे मल्टी कंट्रोल सिस्टम में बदला गया है। अब दोनों पावर ट्रांसफार्मर और 132 केवी फीडरों के लिए पृथक-पृथक ब्रेकर लगाए गए हैं। साथ ही ऑक्सिलरी बस और बस कप्लर बे का निर्माण कर उन्हें चालू कर दिया गया है, जिससे अब किसी भी मेंटेनेंस के दौरान बिजली सप्लाई बंद करने की आवश्यकता नहीं होगी।
क्या है,जो बदल गया अब
सबस्टेशन की पुरानी और कमजोर हो चुकी बुनियादी लाइनों को भी पूरी तरह अपग्रेड किया गया है। पुराने पैंथर कंडक्टरों को हटाकर वहां अधिक लोड सहने वाले उच्च क्षमता के जेबरा कंडक्टर लगाए गए हैं। इसके साथ ही 132 केवी मेन बस को डबल कंडक्टर सिस्टम से मजबूती दी गई है। इस बदलाव का सीधा लाभ यह होगा कि बिजली का प्रवाह स्थिर रहेगा और पारेषण के दौरान होने वाले तकनीकी नुकसान में भी कमी आएगी। रिमॉडलिंग के इस कार्य को फैक्ट्री प्रबंधन और वितरण कंपनी के साथ सटीक तालमेल बैठाकर इस तरह अंजाम दिया गया कि कार्य के दौरान क्षेत्र की बिजली आपूर्ति पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा।
पूरे शहर आएगा जद में
इस परियोजना का सबसे प्रभावी पहलू 132 केवी विनोबा भावे सबस्टेशन को मिलने वाला लाभ है। वीएफजे सबस्टेशन के अपग्रेडेशन से अब विनोबा भावे सबस्टेशन को दोहरी आपूर्ति व्यवस्था (डबल सप्लाई) से जोडऩे का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। जबलपुर के इतिहास में बिजली व्यवस्था को लेकर यह एक दूरगामी परिणाम वाला कार्य है। इससे भविष्य में शहर के बड़े क्षेत्र को डबल सर्किट से जोड़ा जा सकेगा। इस प्रणाली के सक्रिय होने से अब बिजली गुल होने या लंबे समय तक अंधेरा रहने जैसी समस्याओं की संभावना लगभग समाप्त हो गई है।
स्थिर और विश्वसनीय
पारेषण नेटवर्क का विकास
इस पूरे प्रोजेक्ट के संपन्न होने से जबलपुर की विद्युत वितरण व्यवस्था अधिक स्थिर और भरोसेमंद हो गई है। रिमॉडलिंग के बाद अब डिफेंस फैक्ट्रियों को अधिक लचीली और निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। पुराने ढांचे को आधुनिक मानकों के अनुरूप ढालने से न केवल वर्तमान लोड को संभालना आसान होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भी यह सबस्टेशन अब पूरी तरह सक्षम है। यह सकारात्मक बदलाव शहर के औद्योगिक और नागरिक बुनियादी ढांचे की मजबूती के लिए एक अनिवार्य कदम साबित होगा।
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