
जबलपुर। शहर और जिले के विकास के लिए शुरू की गई रीडेंसिफिकेशन स्कीम सुस्त रफ्तार का शिकार होती नजर आ रही है। करोड़ों रुपये की लागत से शुरू किए गए अधिकांश निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा के करीब पहुंचने के बावजूद अधूरे पड़े हैं। स्थिति यह है कि 112 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई 16 परियोजनाओं में से अब तक केवल दो ही पूरी हो सकी हैं, जबकि करीब 54 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद कुल कार्य प्रगति 50 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच पाई है।
54 करोड़ खर्च, नतीजे सीमित
रिकॉर्ड के अनुसार 112 करोड़ रुपये की परियोजनाओं में अब तक लगभग 54 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इनमें सबसे अधिक करीब 32 करोड़ रुपये महाधिवक्ता कार्यालय भवन पर और लगभग 20 करोड़ रुपये नयागांव आवासीय परियोजना पर व्यय किए गए हैं।
देरी के पीछे क्या वजह?
निर्माण एजेंसियां भूमि स्वीकृति, तकनीकी अनुमति और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को देरी का कारण बता रही हैं। हालांकि समयसीमा समाप्त होने के करीब होने के बावजूद कई परियोजनाओं की प्रगति बेहद धीमी है, जिससे विकास कार्यों पर सवाल उठ रहे हैं।
जून तक महाधिवक्ता कार्यालय पूरा करने का दावा
मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का कहना है कि सभी निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग के अनुसार महाधिवक्ता कार्यालय भवन को 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि एल्गिन और विक्टोरिया अस्पताल की परियोजनाओं में भी काम तेज किया जा रहा है।
प्रमुख परियोजनाओं की स्थिति
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