नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव के माहौल के बीच भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से एक खास समुदाय के लोग इजरायल पहुंच रहे हैं। मणिपुर (Manipur) और मिजोरम (Mizoram) से 249 लोग हाल ही में तेल अवीव पहुंचे हैं। ये लोग खुद को इजरायल की “10 खोई हुई जनजातियों” (Bnei Menashe) में से एक बताते हैं और बनेई मेनाशे समुदाय से जुड़े हैं।
कौन हैं बनेई मेनाशे?
बनेई मेनाशे समुदाय के लोग मिजो और कुकी आदिवासी समूहों से जुड़े माने जाते हैं। उनकी मान्यता है कि वे प्राचीन इस्राइली जनजाति ‘मेनाशे’ के वंशज हैं। इस समुदाय के करीब 7,000 सदस्य भारत में रहते हैं, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में लोग इजरायल जा चुके हैं।
पहले भी हो चुका है बड़े पैमाने पर माइग्रेशन
शावेई इजरायल के मुताबिक, अब तक करीब 4,000 बनेई मेनाशे सदस्यों को इजरायल बसाने में मदद की जा चुकी है। 2006, 2007 और 2018 में भी इस समुदाय के लोग बड़ी संख्या में वहां गए थे।
कानूनी स्थिति और विशेष अनुमति
इजरायल के कानून के अनुसार बनेई मेनाशे को सीधे तौर पर यहूदी नहीं माना जाता, इसलिए उनके पुनर्वास के लिए विशेष अनुमति की जरूरत होती है। इजरायल में मौजूद डेगेल मेनाशे ने नए लोगों के पहुंचने की पुष्टि की है।
आगे और लोगों के जाने की तैयारी
संगठनों के अनुसार, आने वाले समय में और भी लोग इजरायल पहुंचेंगे। इन्हें उत्तरी इजरायल के शहरों में बसाया जाएगा। आने वाले हफ्तों में दो और फ्लाइट्स से करीब 600 लोगों के पहुंचने की उम्मीद है, जबकि साल के अंत तक और 600 लोग जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, यह सिर्फ एक माइग्रेशन नहीं, बल्कि पहचान, आस्था और ऐतिहासिक दावों से जुड़ा एक बड़ा सामाजिक-धार्मिक घटनाक्रम है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में बना हुआ है।
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