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नेपाल में नौकरी के लिए नए नियम, 60 की उम्र में होगा रिटायरमेंट

April 26, 2026

नई दिल्ली। नेपाल सरकार (Government of Nepal) ने संघीय सिविल सेवा बिल (Federal Civil Service Bill) का मसौदा तैयार किया है, जिसमें सिविल सेवा में रिटायरमेंट की उम्र 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष करने और लोक सेवा आयोग (PSC) में प्रवेश की अधिकतम आयु सीमा घटाने का प्राविधान किया गया है। यह बिल संघीयता को प्रभावी ढंग से लागू करने और प्रशासनिक प्रणाली को अधिक पेशेवर व योग्यता-आधारित बनाने का प्रयास है।

रिटायरमेंट की उम्र 58 से 60 वर्ष करने का प्रस्ताव
बिल के मुताबिक, पुरुषों के लिए सिविल सेवा में प्रवेश की अधिकतम उम्र 35 वर्ष से घटाकर 32 वर्ष और महिलाओं के लिए 40 वर्ष से घटाकर 35 वर्ष कर दी गई है। इससे युवा और अधिक ऊर्जावान उम्मीदवारों को सरकारी कामकाज में मौका मिलेगा। मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक ये बदलाव लंबे समय से चली आ रही मांगों को ध्यान में रखकर किए गए हैं।


  • बिल में प्रांतों में अलग-अलग सिविल सेवा स्थापित करने, प्रदर्शन-आधारित मूल्यांकन प्रणाली लागू करने और विभागीय प्रमुखों और प्रशासनिक नेतृत्व पदों पर मेरिट के आधार पर नियुक्ति का प्राविधान है। ट्रेड यूनियनों को पूरी तरह खत्म करने का फैसला भी लिया गया है। कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए वैकल्पिक तंत्र विकसित किए गए हैं।

    ट्रांसफर से इनकार तो नहीं मिलेगा प्रमोशन
    बिल में राजनीतिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। दूरदराज के इलाकों या स्थानीय तहसील स्तर पर पद संभालने से इनकार करने वाले कर्मचारियों को प्रमोशन का अधिकार नहीं मिलेगा। ट्रांसफर प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जाएगा और कर्मचारियों को सात दिनों के अंदर रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। एक ही पद और कार्यालय में चार वर्ष से अधिक रहना बैन होगा। आरक्षण का लाभ अब केवल एक बार नॉन-गजेटेड और एक बार गजेटेड स्तर पर ही लिया जा सकेगा, जिसकी जांच केंद्रीय रिकॉर्ड सिस्टम से की जाएगी।

    चौथी बार बिल तैयार
    प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के कार्यभार संभालने के बाद घोषित एक्शन प्लान के तहत 45 दिनों की समयसीमा में यह मसौदा एक महीने में तैयार कर लिया गया। प्रांतीय मुख्यमंत्रियों ने भी 16 अप्रैल को हुई बैठक में संघीय सरकार से सिविल सेवा कानून शीघ्र लाने की मांग की थी। यह चौथा प्रयास है। इससे पहले 2017, 2022 और 2024-25 में ऐसे विधेयक लाए गए थे, लेकिन सहमति न बन पाने या सदन भंग होने के कारण पास नहीं हो सके।

    ‘द काठमांडू पोस्ट’ की खबर के मुताबिक मंत्री प्रतिभा रावल ने कहा, ‘यह प्रस्ताव योग्यता-आधारित सिविल सेवा बनाने पर केंद्रित है, जिसमें मेरिट और प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे संघीय शासन व्यवस्था मजबूत होगी और तीनों स्तरों के बीच समन्वय बेहतर होगा। सरकार अब इस मसौदे को कैबिनेट में चर्चा के बाद संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है। अगर यह कानून बन गया तो नेपाल में लंबे समय से लंबित संघीय सिविल सेवा ढांचा अंततः साकार हो सकेगा।

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