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क्या होते हैं हाइपरसोनिक हथियार? ‘नियर स्पेस’ में भारत की बड़ी तैयारी, बढ़ेगी मारक क्षमता

May 01, 2026

नई दिल्ली। आधुनिक युद्ध (Modern Warfare) में तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ रही है और इसी दिशा में भारत भी अब अगली पीढ़ी के हथियारों पर फोकस कर रहा है। खासतौर पर ‘नियर स्पेस’ (‘Near Space’) में ऑपरेशन और हाइपरसोनिक गति वाले हथियारों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं।


  • क्या होता है हाइपरसोनिक हथियार?

    हाइपरसोनिक हथियार वे होते हैं जो ध्वनि की गति (Mach 1) से कम से कम 5 गुना या उससे ज्यादा तेज यानी Mach 5+ की रफ्तार से उड़ते हैं।
    इनकी खासियतें:

    बेहद तेज गति (5,000–25,000 किमी/घंटा तक)
    रास्ता बदलने (मैन्युवर) की क्षमता
    रडार से पकड़ना मुश्किल
    पारंपरिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने की क्षमता

    इन्हें आमतौर पर दो प्रकारों में बांटा जाता है:

    हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV)
    हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल
    ‘नियर स्पेस’ क्या है और क्यों अहम है?

    ‘नियर स्पेस’ पृथ्वी की सतह से लगभग 20 से 100 किलोमीटर के बीच का क्षेत्र होता है—यानी वायुमंडल और अंतरिक्ष के बीच का हिस्सा।

    यही वह ज़ोन है जहां भविष्य के युद्ध लड़े जा सकते हैं, क्योंकि:

    यहां से पूरी दुनिया की निगरानी संभव
    दुश्मन की गतिविधियों पर रियल-टाइम नजर
    मिसाइल और ड्रोन संचालन के लिए आदर्श क्षेत्र
    भारत की क्या है तैयारी?

    रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने ‘नियर स्पेस’ तकनीकों पर काम शुरू कर दिया है। इसमें शामिल हैं:

    एयरशिप और हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म
    हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल
    एआई आधारित निगरानी सिस्टम
    सोलर-पावर्ड ड्रोन
    सर्विलांस बैलून

    इसके साथ ही भारत ‘नियर स्पेस कमांड’ बनाने की दिशा में भी योजना तैयार कर रहा है, जिससे वायुसेना की क्षमता कई गुना बढ़ सकती है।

    चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में क्यों जरूरी?

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन पहले ही इस क्षेत्र में सक्रिय है और उसने ‘नियर स्पेस’ को अपनी सैन्य रणनीति का हिस्सा बना लिया है।

    ऐसे में भारत के लिए भी यह जरूरी हो गया है कि वह:

    अपनी निगरानी क्षमता मजबूत करे
    दुश्मन की मिसाइल और गतिविधियों पर पहले से नजर रखे
    जरूरत पड़ने पर तेज और सटीक जवाब दे सके

    भविष्य में किसी संघर्ष की स्थिति में पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के खिलाफ इन तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है।

    क्या बदलेगा इससे?
    युद्ध की गति और रणनीति पूरी तरह बदल जाएगी
    पारंपरिक रक्षा प्रणालियां कम प्रभावी हो सकती हैं
    अंतरिक्ष और वायु के बीच का क्षेत्र नया युद्धक्षेत्र बनेगा

    कुल मिलाकर, हाइपरसोनिक हथियार और ‘नियर स्पेस’ टेक्नोलॉजी आने वाले समय में सैन्य ताकत का सबसे बड़ा पैमाना बनने जा रही है—और भारत अब इस दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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