
बेंगलुरु। कर्नाटक (Karnataka) के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार (D. K. Shivakumar) ने तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर (Rajendra Vishwanath Arlekar) के उस कथित निर्णय की आलोचना की है, जिसमें अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) को सरकार बनाने और विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर नहीं दिए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
क्या बोले शिवकुमार?
विधान सौधा में मीडिया से बातचीत करते हुए शिवकुमार ने कहा कि यदि किसी दल के पास पर्याप्त समर्थन है, तो राज्यपाल को उसे सरकार गठन का दावा पेश करने से रोकने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि विजय को बहुमत साबित करने का अवसर न देना उचित कदम नहीं माना जा सकता।
कई पुराने उदाहरण दिए
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में कर्नाटक और राष्ट्रीय राजनीति के कई पुराने उदाहरण भी दिए। उन्होंने कहा कि अतीत में राज्यपालों और राष्ट्रपतियों ने सबसे बड़ी पार्टी या दावेदार दल को सरकार बनाने का मौका दिया और बाद में सदन में बहुमत परीक्षण कराया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें भी सरकार बनाने का अवसर दिया गया था।
इसके अलावा शिवकुमार ने पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन, एपीजे अब्दुल कलाम और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र करते हुए कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों ने पहले भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करते हुए बहुमत परीक्षण का रास्ता अपनाया था।
TVK को बहुमत साबित करने का मौका देना चाहिए
उन्होंने कहा कि तमिलगा वेट्री कजगम को भी विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने का अवसर मिलना चाहिए। शिवकुमार के मुताबिक लोकतंत्र में एक-एक वोट की अहमियत होती है और यदि कोई दल बहुमत साबित नहीं कर पाता, तभी अगले विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए। उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसी भी राज्य में जनता के जनादेश और भावनाओं का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए और संवैधानिक संस्थाओं को उसी भावना के अनुरूप निर्णय लेना चाहिए।
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