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UP : योगी कैबिनेट का विस्तार आज, सपा से आए इन नेताओं को मौका, छह नए मंत्री ले सकते हैं शपथ

May 10, 2026

लखनऊ. उत्तर प्रदेश (UP)  में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव (assembly elections) से पहले योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) सरकार के मंत्रिमंडल (Cabinet) का विस्तार होने जा रहा है. इसे लेकर लखनऊ में तैयारियां तेज हो गई हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस संबंध में शनिवार शाम राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से मुलाकात की. 10 मई को दोपहर 3 बजे लखनऊ लोकभवन में नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी. योगी मंत्रिमंडल में खाली पड़ी 6 सीटों को भरने के लिए रविवार को नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी.

जानकारी के मुताबिक, योगी सरकार में कुछ नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना है. इसके साथ ही साथ कई मंत्रियों के विभाग बदलने की भी चर्चा है. जिन नेताओं को मंत्री बनाए जाने की संभावना है, उनमें पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी (एमएलसी), मनोज पांडे (रायबरेली), कृष्णा पासवान (फतेहपुर), हंसराज विश्वकर्मा (वाराणसी), सुरेंद्र वाल्मीकि (हाथरस) और कैलाश लोधी (कन्नौज) शामिल हैं.


  • इनके अलावा अशोक कटारिया, सुरेश पासी, आशीष सिंह और पूजा पाल को भी मंत्री बनाए जाने की चर्चाएं हैं. हालांकि अभी तक सरकार या पार्टी की तरफ से नामों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. भाजपा मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में संगठनात्मक और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश में है. लोकसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक माहौल में भाजपा उत्तर प्रदेश में अपने संगठन और सरकार दोनों को नए तरीके से संतुलित करने की रणनीति पर काम कर रही है.

    अखिलेश यादव ने कसा तंज
    यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तंज कसा है. उन्होंने लिखा, ‘दिल्ली से पर्ची आ गयी क्या? सुना है यूपी में कैबिनेट का विस्तार हो रहा है या यूं कहें कि मुख्यमंत्री योगी की शक्ति का ‘कटाव-झटाव’ हो रहा है. जिनका मंत्रिमंडल है उनसे भी तो कोई पूछ ले. हमारी मांग है कि यूपी के मंत्रिमंडल विस्तार में महिलाओं को आरक्षण दिया जाए. वैसे ये सवाल भी कुलबुला रहा है : ‘अगल-बगल’ की जोड़ी का कुछ हला-भला होगा या फिर वो ‘अगले-बगले’ ही झांकते रह जाएंगे या सिर्फ रील बनाते…’

    ओबीसी, एससी और सवर्ण कोटे से बनेंगे मंत्री
    दलितों में पासी और वाल्मीकि समाज से आने वाले नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना है, जबकि अति पिछड़ा वर्ग से विश्वकर्मा समाज और पिछड़े वर्ग से लोधी और जाट समुदाय को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है. एक ब्राह्मण चेहरे को भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चा है.

    जिन नेताओं के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, उनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और बीजेपी के जाट चेहरे भूपेंद्र चौधरी का नाम लगभग तय माना जा रहा है. भूपेंद्र चौधरी फिलहाल विधान परिषद सदस्य हैं और योगी सरकार के पिछले कार्यकाल में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं. प्रदेश अध्यक्ष पद से हटने के बाद इसे उनके राजनीतिक समायोजन के तौर पर भी देखा जा रहा है.

    समाजवादी पार्टी से बगावत कर बीजेपी के करीब आए नेताओं में से भी कुछ चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है. ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडे का नाम कैबिनेट मंत्री के तौर पर लगभग तय माना जा रहा है. मनोज पांडे कभी अखिलेश यादव के बेहद करीबी नेताओं में गिने जाते थे.

    कौशांबी की चायल सीट से विधायक पूजा पाल के भी मंत्री बनने की चर्चा तेज है. पूजा पाल प्रयागराज से आती हैं और दिवंगत विधायक राजू पाल की पत्नी हैं, जिनकी हत्या अतीक अहमद पर कराए जाने का आरोप लगा था. अतीक अहमद की मौत के बाद से पूजा पाल खुलकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में नजर आई थीं.

    फतेहपुर से आने वाली कृष्णा पासवान का नाम भी मंत्री पद के लिए चर्चा में है. वहीं वाराणसी के जिलाध्यक्ष और एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा को भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है. हंसराज विश्वकर्मा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी नेताओं में माना जाता है.

    इसके अलावा एक मंत्री वाल्मीकि समाज और एक लोधी समाज से बनाए जाने की संभावना है. सुरेश पासी, आशा मौर्य और सुरेंद्र दिलेर के नाम भी चर्चा में हैं. सूत्रों के अनुसार, पूर्व आईपीएस अधिकारी और दलित चेहरे असीम अरुण का कद भी पार्टी बढ़ा सकती है. उन्हें स्वतंत्र प्रभार से कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है. साथ ही कुछ विभागों में फेरबदल के भी संकेत मिल रहे हैं.

    ऐसे में संभावित कैबिनेट विस्तार को सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है. क्योंकि अगले साल ही प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने जा रहा है. अगर विस्तार होता है तो नए मंत्रियों को शामिल कर क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को मजबूत करने की कोशिश की जा सकती है.

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