
नई दिल्ली। सनातन परंपरा (Sanatan Tradition) में अमावस्या तिथि (Amavasya) का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है और ज्येष्ठ महीने (Jyeshtha Month) की अमावस्या को और भी खास माना गया है। वर्ष 2026 में यह अमावस्या 16 मई, शनिवार को पड़ रही है, जिसे शनि जयंती और वट सावित्री व्रत के साथ भी जोड़ा जा रहा है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई 2026 को सुबह 05:11 बजे शुरू होकर 17 मई 2026 को रात 01:30 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर इसका पालन 16 मई को ही किया जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विशेष महत्व
मान्यता है कि अमावस्या का दिन पितरों को समर्पित होता है। इस दिन स्नान, दान और तर्पण करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। शनि जयंती के संयोग के कारण इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है।
अमावस्या पर किन कामों से बचना चाहिए
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ कार्यों से बचना शुभ माना जाता है, क्योंकि इन्हें नकारात्मक परिणामों से जोड़ा जाता है। इस दिन बाल और नाखून काटना वर्जित माना गया है, विशेषकर तब जब यह शनि जयंती और अमावस्या के संयोग में हो। ऐसा करने से अशुभ प्रभाव की संभावना बताई जाती है।
इस दिन बुजुर्गों और पूर्वजों का सम्मान करना आवश्यक माना गया है। मान्यता है कि उनका अपमान या अनादर करने से पितृ दोष बढ़ सकता है और परिवार में अशांति आ सकती है। इसके अलावा तामसिक भोजन से परहेज और शुद्धता बनाए रखने की सलाह दी जाती है। देर तक सोने या आलस्य करने से भी बचने की परंपरा है।
नकारात्मक स्थानों और नए कार्यों से दूरी
अमावस्या के दिन सुनसान स्थानों, श्मशान घाट या खंडहर जैसे इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन नकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय रहती है। इसके साथ ही इस दिन नए कार्यों की शुरुआत या नई वस्तुओं की खरीद को भी शुभ नहीं माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं।
(Disclaimer- यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है। हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते है।)
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