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UAE का बड़ा दांव! होर्मुज को ठेंगा दिखाकर समुद्र के रास्ते भेजेगा तेल, जानिए क्या है सीक्रेट प्लान?

May 15, 2026

नई दिल्ली। ईरान-इजरायल और अमेरिका (Iran, Israel, and the United States) के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। खासकर तेल सप्लाई को लेकर खाड़ी देशों में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। UAE अब ऐसा तेल पाइपलाइन नेटवर्क तैयार कर रहा है, जिससे वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर हुए बिना सीधे समुद्र के रास्ते दुनिया को तेल भेज सकेगा। UAE के इस फैसले को क्षेत्रीय तनाव और संभावित तेल संकट से बचने की तैयारी माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह प्रोजेक्ट पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा असर डाल सकता है।

क्या है UAE का नया सीक्रेट प्लान?
UAE ने अपने बड़े तेल प्रोजेक्ट वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन के निर्माण को तेजी से पूरा करने का फैसला लिया है। अबू धाबी के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने इस प्रोजेक्ट को फास्ट-ट्रैक करने के निर्देश दिए हैं। यह पाइपलाइन UAE की तेल निर्यात क्षमता को दोगुना कर देगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इसके जरिए तेल सीधे फुजैराह बंदरगाह तक पहुंचेगा, जहां से जहाजों के जरिए दुनिया के दूसरे देशों को सप्लाई की जाएगी।


  • होर्मुज क्यों है इतनी अहम?
    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक मानी जाती है। दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरती है।लेकिन ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण इस इलाके में तनाव बेहद बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की प्रतिक्रिया के बाद यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। यही वजह है कि कई खाड़ी देश अब वैकल्पिक रास्ते तलाश रहे हैं।

    पहले से मौजूद है खास पाइपलाइन
    UAE के पास पहले से अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन (ADCOP) मौजूद है, जिसे हबशन-फुजैराह पाइपलाइन भी कहा जाता है। यह रोजाना करीब 18 लाख बैरल तेल सीधे फुजैराह तक पहुंचा सकती है। अब नई वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन बनने के बाद UAE बिना होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर हुए और ज्यादा मात्रा में तेल निर्यात कर सकेगा।

    दूसरे खाड़ी देशों की बढ़ सकती है चिंता
    UAE और सऊदी अरब ऐसे गिने-चुने खाड़ी देश हैं, जिनके पास हॉर्मुज से बाहर तेल भेजने की सुविधा है। वहीं कुवैत, इराक, कतर और बहरीन जैसे देश अब भी काफी हद तक इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर हैं। अगर क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है, तो इन देशों के लिए तेल सप्लाई बनाए रखना बड़ी चुनौती बन सकता है।

    दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक तनाव बना रहा, तो दुनिया भर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका असर पेट्रोल-डीजल से लेकर महंगाई तक हर चीज पर दिखाई दे सकता है।

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