
नई दिल्ली ।बॉलीवुड में एक समय ऐसा था जब हॉरर (Horror) फिल्मों का नाम सुनते ही दर्शकों के रोंगटे खड़े हो जाते थे। बड़े पर्दे पर डर (Fear), रहस्य (Mystery) और खौफ (Terror) का ऐसा माहौल बनाया जाता था कि लोग फिल्म खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक उसके असर से बाहर नहीं निकल पाते थे। 1978 में रिलीज हुई एक ऐसी ही फिल्म ने पूरे देश में सनसनी फैला दी थी। इस फिल्म का नाम था ‘दरवाजा (Door)’, जिसे आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे डरावनी फिल्मों में गिना जाता है।
रामसे ब्रदर्स की फिल्मों का जिक्र होते ही लोगों के दिमाग में डरावने महल, रहस्यमयी आवाजें और खौफनाक चेहरे घूमने लगते हैं। श्याम रामसे और तुलसी रामसे की जोड़ी ने उस दौर में हॉरर फिल्मों को एक अलग पहचान दी थी। ‘दरवाजा’ भी उन्हीं फिल्मों में शामिल थी जिसने रिलीज होते ही दर्शकों को डर के एक नए अनुभव से रूबरू कराया। फिल्म का माहौल इतना भयावह था कि कई लोग इसे देखने के बाद घबरा जाते थे।
फिल्म से जुड़ा सबसे चौंकाने वाला किस्सा यह था कि सिनेमाघरों के बाहर एंबुलेंस तक खड़ी रखी जाती थी। कहा जाता है कि फिल्म के कुछ ट्रायल शो के दौरान कई दर्शक डर की वजह से असहज महसूस करने लगे थे। इसके बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए थिएटर के बाहर एंबुलेंस रखने का फैसला लिया गया। उस दौर में यह बात लोगों के बीच तेजी से फैल गई और फिल्म का खौफ और ज्यादा बढ़ गया।
फिल्म की पब्लिसिटी भी अपने समय से काफी अलग और अनोखी थी। दर्शकों के बीच डर का माहौल बनाने के लिए एक खास चुनौती रखी गई थी। कहा गया कि जो भी व्यक्ति पूरी फिल्म अकेले बैठकर देख लेगा, उसे 10 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। उस समय 10 हजार रुपये बहुत बड़ी रकम मानी जाती थी। लेकिन डर का असर ऐसा था कि किसी ने भी अकेले फिल्म देखने की हिम्मत नहीं दिखाई। यह प्रचार रणनीति फिल्म के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुई और लोगों की उत्सुकता लगातार बढ़ती चली गई।
‘दरवाजा’ केवल एक साधारण हॉरर फिल्म नहीं थी, बल्कि उस दौर की सबसे चर्चित क्रिएचर हॉरर फिल्मों में से एक बन गई थी। फिल्म में डरावने दृश्यों और रहस्यमयी घटनाओं को जिस अंदाज में दिखाया गया, उसने दर्शकों को पूरी तरह बांधे रखा। सिनेमाघरों में फिल्म देखने पहुंचे लोग चीखने लगते थे और कई जगहों पर दर्शकों की भीड़ इतनी ज्यादा हो जाती थी कि टिकट मिलना मुश्किल हो जाता था।
इस फिल्म में अनिल धवन, श्यामली, इम्तियाज खान, अंजू महेंद्रू, शक्ति कपूर, त्रिलोक कपूर और कृष्ण धवन जैसे कलाकार नजर आए थे। सभी कलाकारों ने अपने किरदारों से फिल्म के डरावने माहौल को और प्रभावशाली बना दिया था। फिल्म का निर्देशन श्याम रामसे और तुलसी रामसे ने किया था, जबकि इसकी कहानी और प्रस्तुति ने इसे भारतीय हॉरर सिनेमा की यादगार फिल्मों में शामिल कर दिया।
आज भले ही तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स के जरिए हॉरर फिल्मों को और ज्यादा भव्य बनाया जाता हो, लेकिन ‘दरवाजा’ जैसी फिल्मों का खौफ आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। यही वजह है कि दशकों बाद भी इस फिल्म की चर्चा होते ही पुराने दौर के दर्शकों की यादें ताजा हो जाती हैं।
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