img-fluid

होर्मुज रूट पर फिर लौटेगा भारत! युद्ध के बाद पहली बार तेल लाने भेजे जाएंगे जहाज, नेवी करेगी सुरक्षा

May 21, 2026

मुंबई। ईरान युद्ध (iran war) के बाद बंद पड़े होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते भारत एक बार फिर अपने तेल पोत भेजने की तैयारी में है। अगर योजना को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो यह पहली बार होगा जब युद्ध शुरू होने के बाद भारतीय जहाज इस संवेदनशील समुद्री मार्ग से होकर कच्चा तेल लेकर आएंगे। सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए भारतीय नौसेना भी इस मिशन में अहम भूमिका निभाएगी।

सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार, तेल कंपनियों और शिपिंग एजेंसियों के बीच इस मुद्दे पर लगातार चर्चा चल रही है। अधिकारियों ने बताया कि पूरी योजना अंतिम चरण में है और मंजूरी मिलते ही जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकती है। हालांकि सुरक्षा कारणों से अभी तेल की मात्रा और समयसीमा जैसी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गई हैं।



  • नौसेना की हरी झंडी का इंतजार
    जानकारी के अनुसार सरकारी कंपनी Shipping Corporation of India (SCI) फारस की खाड़ी में अपने पोत भेजने के लिए तैयार है। कंपनी भारतीय नौसेना से सुरक्षा मंजूरी और रिफाइनरियों से व्यापारिक आदेश मिलने का इंतजार कर रही है।

    दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल है होर्मुज
    Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर समुद्र के जरिए भेजे जाने वाले लगभग 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। लेकिन ईरान युद्ध के बाद इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से तेल परिवहन लगभग ठप हो गया था।

    भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है। ऐसे में इस मार्ग के प्रभावित होने का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ा है।

    सरकार ने शुरू की विशेष समुद्री बीमा योजना
    बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने हाल ही में उच्च जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों के लिए विशेष समुद्री बीमा पहल भी शुरू की है। इसका मकसद भारतीय जहाजों और तेल कार्गो को सुरक्षा कवच देना है, ताकि संकट के बीच भी सप्लाई चेन बनी रहे।

    हालांकि भारत ने हाल के महीनों में रूस समेत अन्य देशों से तेल खरीद बढ़ाई है, लेकिन ऊर्जा जरूरतों के लिए उसकी बड़ी निर्भरता अब भी मध्य पूर्व पर बनी हुई है।

    मध्य पूर्व से तेल सस्ता और तेज

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए मध्य पूर्व से तेल खरीदना ज्यादा व्यावहारिक और किफायती है। दूसरे देशों से तेल मंगाने में लंबा समय और अधिक परिवहन लागत लगती है। यही वजह है कि जोखिम के बावजूद भारत फिर से होर्मुज रूट को सक्रिय करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

    इस बीच भारतीय नौसेना ने अरब सागर और आसपास के इलाकों में निगरानी और गश्त भी बढ़ा दी है, ताकि भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    रूसी तेल पर भी बना हुआ है दबाव

    दूसरी ओर रूस से तेल खरीद को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा लगातार बना हुआ है। हालांकि हाल ही में Donald Trump प्रशासन ने एक सीमित छूट दी है, जिसके तहत पहले से टैंकरों में लोड रूसी कच्चे तेल की बिक्री की अनुमति दी गई है।

    Share:

  • ईरान जंग में US के 17 जेट तबाह, 29 अरब डॉलर भी फूंका... पढ़े नुकसान की पूरी लिस्ट

    Thu May 21 , 2026
    डेस्क: ईरान जंग में अमेरिकी हथियारों का कितना नुकसान हुआ, इसकी असली सूची सामने आ गई है. अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबि ईरान के साथ 40 दिन तक चली जंग में पेंटागन के 17 विमान या तो पूरी तरह से तबाह हो गए या फिर क्षतिग्रस्त हो गए. इनमें F-35 विमान भी शामिल […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved