वॉशिंगटन। अमेरिका ने क्यूबा (US to Cuba) के पूर्व राष्ट्रपति (Raúl Castro) के खिलाफ हत्या और साजिश से जुड़े गंभीर आरोप दर्ज किए हैं। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति (Donald Trump) क्यूबा पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपना सकते हैं।
यह मामला 1996 की उस घटना से जुड़ा है, जब क्यूबा की वायुसेना ने कास्त्रो विरोधी समूह के दो नागरिक विमानों को मार गिराया था। इस घटना में चार लोगों की मौत हुई थी और तब अमेरिका-क्यूबा संबंधों में भारी तनाव पैदा हो गया था।
मियामी में प्रेस कॉन्फ्रेंस, अमेरिका का सख्त संदेश
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने मियामी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका राउल कास्त्रो को न्याय के कटघरे में लाना चाहता है। उन पर अमेरिकियों की हत्या की साजिश, विमान नष्ट करने और हत्या जैसे आरोप लगाए गए हैं।
इस मामले में पांच अन्य क्यूबाई नागरिकों पर भी आरोप लगाए गए हैं, जिनमें वे पायलट भी शामिल बताए जा रहे हैं जिन्होंने विमानों को गिराया था।
डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटनाक्रम को “बहुत बड़ा पल” बताया, हालांकि उन्होंने तुरंत सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार किया। ट्रंप ने कहा कि क्यूबा की स्थिति पहले ही काफी खराब है और वहां हालात बिखरे हुए हैं।
हाल के महीनों में ट्रंप कई बार क्यूबा पर सख्त रुख अपना चुके हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिए थे कि अमेरिका कैरेबियाई क्षेत्र में अपना प्रभाव और बढ़ा सकता है। इसी कारण अब राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम को केवल कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि बड़े भू-राजनीतिक दबाव के रूप में भी देख रहे हैं।
क्यूबा ने आरोपों को बताया ‘राजनीतिक हथियार’
Cuba सरकार ने अमेरिकी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। क्यूबा का कहना है कि 1996 में उठाया गया कदम आत्मरक्षा में था क्योंकि विमानों ने उसके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया था।
क्यूबा के राष्ट्रपति Miguel Díaz-Canel ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि इन आरोपों का कोई कानूनी आधार नहीं है और इन्हें क्यूबा के खिलाफ माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
ओबामा ने सुधारे थे रिश्ते, ट्रंप ने पलटी नीति
करीब दो दशक बाद राउल कास्त्रो ने Barack Obama प्रशासन के दौरान अमेरिका-क्यूबा संबंध सुधारने की कोशिश की थी। दोनों देशों के बीच राजनयिक संवाद भी शुरू हुआ था। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने बाद में उस नीति को बदलते हुए क्यूबा पर कई नए प्रतिबंध लगा दिए।
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वेनेजुएला के बाद अब क्यूबा पर नजर?
विश्लेषकों का मानना है कि वेनेजुएला में अमेरिकी दबाव की रणनीति के बाद अब क्यूबा पर भी अमेरिका का फोकस बढ़ सकता है। अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio, जो खुद क्यूबा मूल के अमेरिकी हैं, पहले भी हवाना सरकार पर भ्रष्टाचार और दमन के आरोप लगा चुके हैं।
उन्होंने संकेत दिया है कि यदि क्यूबा राजनीतिक और आर्थिक सुधारों की दिशा में आगे बढ़ता है, तो अमेरिका आर्थिक सहायता देने को तैयार हो सकता है।
डेमोक्रेट नेताओं ने दी चेतावनी
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ डेमोक्रेट नेता Gregory Meeks ने इस पूरे मामले में सैन्य तनाव बढ़ने को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि दोषियों को जवाबदेह ठहराना जरूरी है, लेकिन इस मुद्दे का इस्तेमाल किसी संभावित सैन्य कार्रवाई के बहाने के रूप में नहीं होना चाहिए।
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