
नई दिल्ली ।ज्योतिषीय (Astrological) मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य (Sun) रोहिणी नक्षत्र (Rohini Nakshatra) में प्रवेश करते हैं, तब नौतपा (Nine Day Heat Period) की शुरुआत मानी जाती है। इस अवधि को वर्ष का सबसे अधिक गर्म और ऊर्जा से भरपूर समय माना जाता है, जो इस बार 25 मई से शुरू होकर 2 जून 2026 तक रहेगा। इस दौरान मौसम के साथ-साथ ग्रहों की स्थिति का प्रभाव भी कई लोगों के जीवन पर देखने को मिल सकता है। खासकर कुछ राशियों (Zodiac Signs) के लिए यह समय मानसिक दबाव, आर्थिक अस्थिरता और संबंधों में तनाव लेकर आ सकता है।
ज्योतिष के अनुसार सूर्य को आत्मविश्वास, सम्मान और ऊर्जा का कारक माना जाता है। जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं तो इसका प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग रूप से पड़ता है। इस अवधि में कुछ लोगों के लिए यह समय सावधानी और संयम की परीक्षा बन सकता है। विशेष रूप से चार राशियों पर इसका असर अधिक चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, जिनमें मिथुन, वृश्चिक, धनु और कुंभ राशि शामिल हैं।
मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने का संकेत दे रहा है। इस दौरान अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं, जिससे बजट बिगड़ने की संभावना रहती है। निवेश से जुड़े निर्णय सोच-समझकर लेने की जरूरत होगी, अन्यथा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह समय धन प्रबंधन और संयम बनाए रखने का है ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके।
वृश्चिक राशि के लोगों के लिए यह अवधि स्वभाव और व्यवहार पर नियंत्रण रखने की सलाह देती है। गुस्से और जल्दबाजी के कारण कार्यस्थल पर विवाद की स्थिति बन सकती है। सहकर्मियों या वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गलतफहमी बढ़ने से मानसिक तनाव भी हो सकता है। इस समय शांत रहकर निर्णय लेना और बातचीत में संयम रखना बहुत जरूरी माना गया है, अन्यथा सामाजिक और पेशेवर स्तर पर नुकसान हो सकता है।
धनु राशि के जातकों के लिए यह समय स्वास्थ्य और आर्थिक मामलों दोनों में सतर्कता की मांग करता है। खान-पान में लापरवाही के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां सामने आ सकती हैं, विशेषकर पेट से जुड़ी समस्याएं। वहीं आर्थिक निर्णयों में जल्दबाजी नुकसान का कारण बन सकती है। इसलिए इस अवधि में सोच-समझकर कदम उठाना और दिनचर्या को संतुलित रखना आवश्यक होगा।
कुंभ राशि के लिए यह समय मानसिक अस्थिरता और तनाव की स्थिति ला सकता है। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ लोगों के साथ मतभेद की संभावना बन सकती है, जिससे कामकाज प्रभावित हो सकता है। परिवारिक जीवन में भी तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, इसलिए धैर्य और समझदारी के साथ परिस्थितियों को संभालने की सलाह दी जाती है।
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