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हनुमान भक्ति का अनोखा केंद्र: टूंडला का मंदिर, जहां चोला चढ़ाने लगे थे अंग्रेज अधिकारी

May 23, 2026

नई दिल्ली । आस्था (Faith) और विश्वास की भूमि भारत (India) में मंदिरों (Temples) से जुड़ी अनेक ऐसी कथाएं प्रचलित हैं, जो समय के साथ लोगों की श्रद्धा का केंद्र बनती गई हैं। ऐसी ही एक रहस्यमयी और आस्था (Faith) से जुड़ी कथा उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के टूंडला क्षेत्र स्थित दक्षिणमुखी हनुमान (Hanuman) मंदिर (Temple) से जुड़ी है। यह मंदिर (Temple) लगभग 150 वर्ष पुराना माना जाता है और इसे लेकर मान्यता है कि यहां की भक्ति और ऊर्जा ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि विदेशी अधिकारियों तक को प्रभावित किया था।

टूंडला रेलवे कॉलोनी में स्थित यह मंदिर अपनी विशिष्ट दक्षिणमुखी हनुमान प्रतिमा और आस्था से जुड़ी कथाओं के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार ब्रिटिश शासन काल के दौरान यहां एक अधिकारी सोलोमन की तैनाती हुई थी, जो रेलवे व्यवस्था से जुड़े कार्यों की देखरेख करते थे। कहा जाता है कि इस दौरान उन्होंने मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

स्थानीय श्रद्धालुओं और रेलकर्मियों की गहरी आस्था को देखकर वह धीरे-धीरे इस मंदिर से जुड़ते चले गए। कथाओं के अनुसार, पुनर्निर्माण के समय उन्हें कुछ ऐसे अनुभव हुए, जिन्हें उन्होंने असाधारण और चमत्कारिक माना। इन घटनाओं ने उनके जीवन और सोच पर गहरा प्रभाव डाला। समय के साथ उनकी श्रद्धा इतनी बढ़ गई कि उन्होंने चर्च की परंपराओं से दूरी बनाकर हनुमान जी की भक्ति को अपनाने की बात कही जाती है।

मान्यता है कि उन्होंने न केवल हनुमान जी की पूजा आरंभ की बल्कि नियमित रूप से मंदिर में चोला चढ़ाने की परंपरा भी शुरू की। स्थानीय लोगों के अनुसार, उनका जीवन पूरी तरह आध्यात्मिकता की ओर मुड़ गया और वह इस मंदिर की सेवा में समर्पित हो गए। यह कथा आज भी इस मंदिर की विशेष पहचान के रूप में लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

आजादी के बाद इस मंदिर का नाम रेल मंत्रालय के अभिलेखों में भी दर्ज होने की बात कही जाती है, जिससे इसकी ऐतिहासिक और प्रशासनिक पहचान और मजबूत हुई। इसके बाद से यह मंदिर रेलवे कर्मचारियों और स्थानीय समुदाय की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया।

समय के साथ इस मंदिर की सेवा परंपरा एक परिवार से जुड़ गई। वर्ष 1951 के आसपास पंडित जगदेव प्रसाद त्रिवेदी को यहां पूजा-पाठ की जिम्मेदारी सौंपी गई। उनके बाद यह दायित्व पंडित रामस्वरूप त्रिवेदी ने संभाला और वर्तमान में उनके पुत्र पंडित अरुण त्रिवेदी इस मंदिर में सेवा कार्यों का संचालन कर रहे हैं। यह परंपरा आज भी निरंतरता के साथ जारी है।

मंदिर को लेकर यह भी कहा जाता है कि यहां चोला चढ़ाने और सच्चे मन से पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं।


  • आस्था और श्रद्धा से जुड़ी ऐसी कथाएं इस मंदिर को केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि विश्वास और आध्यात्मिक अनुभवों का केंद्र बनाती हैं। टूंडला का यह दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर आज भी लोगों की आस्था, परंपरा और चमत्कारिक कहानियों के कारण विशेष स्थान रखता है।

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    Sat May 23 , 2026
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