
मॉस्को। रूस (Russia) के नेतृत्व वाले आर्थिक संगठन ने आर्मेनिया (Armenia) को बड़ी चेतावनी दी है। संगठन ने कहा है कि वह आर्मेनिया को बाहर निकाल सकता है। दरअसल, आर्मेनिया अब यूरोपीय संघ (EU) में शामिल होना चाहता है। रूस के गुट को आर्मेनिया की यह बात पसंद नहीं आ रही है। कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में एक बड़ा सम्मेलन हुआ। इस बैठक में रूस, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान के नेता शामिल हुए। इन सभी नेताओं ने कहा कि आर्मेनिया के इस कदम से हमारी आर्थिक सुरक्षा को भारी खतरा है।
दिसंबर में आएगी बड़ी रिपोर्ट
इन चारों देशों के नेताओं ने अपने अधिकारियों को एक आदेश दिया है। अधिकारी दिसंबर में एक रिपोर्ट पेश करेंगे। इस रिपोर्ट में देखा जाएगा कि आर्मेनिया को हटाने से क्या असर पड़ेगा। इन नेताओं ने आर्मेनिया से अपने देश में जनमत संग्रह कराने को भी कहा है। वे चाहते हैं कि आर्मेनिया की जनता खुद चुने कि उन्हें यूरोपीय संघ में जाना है या रूस के आर्थिक गुट में रहना है। हालांकि, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान इस मांग को पहले ही ठुकरा चुके हैं।
चुनाव से ठीक पहले बढ़ा विवाद
यह सारा विवाद आर्मेनिया के संसदीय चुनाव से ठीक पहले शुरू हुआ है। आर्मेनिया में सात जून को वोट डाले जाएंगे। निकोल पाशिन्यान साल 2018 से प्रधानमंत्री हैं। वह अपनी कुर्सी बचाने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले साल अमेरिका ने आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच दशकों पुराना झगड़ा खत्म कराया था। इसके बाद से आर्मेनिया लगातार अमेरिका और यूरोपीय संघ के करीब जा रहा है। पाशिन्यान सरकार ने रूस के सैन्य संगठन (सीएसटीओ) में भी शामिल होना बंद कर दिया है। आर्मेनिया का पश्चिम की तरफ झुकाव रूस को नाराज कर रहा है।
पुतिन ने दी बड़ी आर्थिक तबाही की धमकी
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आर्मेनिया को साफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश एक साथ दोनों संगठनों का हिस्सा नहीं रह सकता। पुतिन के मुताबिक, अगर आर्मेनिया इस गुट से बाहर गया तो उसे अपनी जीडीपी का 14 प्रतिशत नुकसान होगा। रूस ने आर्मेनिया पर दबाव बनाना भी शुरू कर दिया है। रूस ने आर्मेनिया की ब्रांडी, फलों और सब्जियों के आयात पर रोक लगा दी है। रूस ने आर्मेनिया को मिलने वाली सस्ती गैस रोकने की धमकी भी दी है।
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