तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम (Nuclear program) को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने कुछ परमाणु केंद्रों पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को दोबारा प्रवेश की अनुमति नहीं देगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत की संभावनाएं बनी हुई हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इन हमलों से कई महीनों की कूटनीतिक कोशिशों को नुकसान पहुंचा है। मंत्रालय का यह भी कहना है कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े सुरक्षा उपायों को लागू करने की ईरान की प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई से जब पूछा गया कि क्या ईरान IAEA के निरीक्षकों को परमाणु स्थलों पर दोबारा जाने की अनुमति देगा, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फिलहाल ऐसा नहीं होगा। उनका कहना था कि ईरान इस अनुरोध को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है।
यह रुख उस समय सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) के आधार पर परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत जारी रहने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस समझौते में किसी भी पक्ष के लिए कोई निश्चित समयसीमा या बाध्यकारी शर्त तय नहीं की गई है।
कुछ दिन पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उम्मीद जताई थी कि जल्द ही IAEA निरीक्षक ईरान के परमाणु केंद्रों पर दोबारा पहुंच सकेंगे। लेकिन ईरान के ताजा बयान ने इन संभावनाओं पर फिलहाल विराम लगा दिया है।
ईरान के एक वरिष्ठ वार्ताकार ने भी कहा कि परमाणु निरीक्षण से जुड़ा कोई भी फैसला अमेरिका के साथ होने वाले व्यापक समझौते का हिस्सा होगा। अलग से निरीक्षण की अनुमति देने का कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।
वर्ष 2015 में हुए संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) के तहत IAEA को ईरान की परमाणु सुविधाओं का नियमित निरीक्षण करने और निगरानी उपकरण संचालित करने की अनुमति मिली थी। उस समझौते का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण दायरे में बनाए रखना था।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में अमेरिका को इस समझौते से बाहर कर लिया था। इसके बाद ईरान ने धीरे-धीरे IAEA की निगरानी सीमित करनी शुरू कर दी और यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों का विस्तार किया।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम में लगातार विस्तार और IAEA निरीक्षण से इनकार के कारण अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि ईरान हथियार-स्तर के करीब समृद्ध यूरेनियम का उत्पादन करने की क्षमता तक पहुंच चुका है, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए है तथा उसका लक्ष्य परमाणु हथियार विकसित करना नहीं है।
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