वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक बार फिर अपनी महत्वाकांक्षा को लेकर चर्चा छेड़ दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ (Truth Social) पर साझा की गई एक एआई-निर्मित तस्वीर में ट्रंप खुद को अमेरिका (US) के प्रतिष्ठित माउंट रशमोर स्मारक पर उकेरे गए चार महान राष्ट्रपतियों के साथ दिखाते नजर आए। तस्वीर सामने आने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर यह जगह क्या है और ट्रंप यहां अपना चेहरा क्यों देखना चाहते हैं।
दरअसल, यह ऐतिहासिक स्थल अमेरिका के South Dakota राज्य के ब्लैक हिल्स क्षेत्र में स्थित है। यहां विशाल ग्रेनाइट पहाड़ी पर अमेरिका के चार पूर्व राष्ट्रपतियों की 60 फुट ऊंची आकृतियां तराशी गई हैं। यह स्मारक अमेरिकी इतिहास के अलग-अलग चरणों—देश की स्थापना, विस्तार, विकास और संरक्षण—का प्रतीक माना जाता है।
माउंट रशमोर नेशनल मेमोरियल में जिन चार नेताओं के चेहरे उकेरे गए हैं, उनमें अमेरिका के पहले राष्ट्रपति George Washington, तीसरे राष्ट्रपति Thomas Jefferson, 16वें राष्ट्रपति Abraham Lincoln और 26वें राष्ट्रपति Theodore Roosevelt शामिल हैं। इन नेताओं का चयन मूर्तिकार Gutzon Borglum ने अमेरिकी विरासत के शुरुआती 150 वर्षों का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया था।
इन चार राष्ट्रपतियों में जॉर्ज वॉशिंगटन को अमेरिका की स्थापना और स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक माना जाता है। थॉमस जेफरसन देश के क्षेत्रीय विस्तार से जुड़े हैं, जबकि अब्राहम लिंकन को गृहयुद्ध के दौरान अमेरिका की एकता बनाए रखने के लिए याद किया जाता है। थियोडोर रूजवेल्ट राष्ट्रीय विकास और वैश्विक स्तर पर अमेरिका के प्रभाव को मजबूत करने वाले नेता माने जाते हैं।
ट्रंप का नाम इस स्मारक से जोड़ने की चर्चा नई नहीं है। साल 2018 में, तब के राष्ट्रपति ट्रंप ने साउथ डकोटा की तत्कालीन गवर्नर Kristi Noem से कथित तौर पर कहा था कि माउंट रशमोर पर अपना चेहरा उकेरा हुआ देखना उनका ‘सपना’ है। बाद में 2020 में भी इस विचार को सार्वजनिक चर्चाओं में उठाया गया था।
ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि उनके कार्यकाल की उपलब्धियां उन्हें इस प्रतिष्ठित स्मारक में जगह दिलाने योग्य बनाती हैं। वहीं, आलोचकों का मानना है कि माउंट रशमोर ऐतिहासिक महत्व रखने वाले चुनिंदा राष्ट्रपतियों के लिए समर्पित स्मारक है और इसमें किसी नए चेहरे को शामिल करना आसान या सर्वमान्य फैसला नहीं होगा। कुछ विशेषज्ञों ने यह भी दावा किया है कि पहाड़ी पर अतिरिक्त आकृति उकेरने की सीमित जगह मौजूद हो सकती है, हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक योजना सामने नहीं आई है।
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