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कमियों और खामियों के साथ स्कूल खुलने को तैयार!

June 02, 2026

  • बारिश से पहले सरकारी स्कूलों में सुरक्षा इंतजाम फेल रेन वाटर हार्वेस्टिंग से लेकर जर्जर दीवारों तक सब पड़े अधूरे

जबलपुर। ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद जल्द ही सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है। शिक्षा विभाग जहां स्कूलों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण होने के दावे कर रहा है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। विभिन्न शासकीय विद्यालयों में की गई पड़ताल में सामने आया है कि कई स्कूलों में अब भी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े जरूरी कार्य अधूरे पड़े हैं। खासतौर पर मानसून को देखते हुए सुरक्षा और जल निकासी व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। कई परिसरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अधूरा है, ड्रेनेज व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो सकी है और जर्जर संरचनाएं विद्यार्थियों के लिए खतरा बनी हुई हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर बच्चों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर जिम्मेदार विभाग कितना गंभीर है।



  • सरकार लगातार जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने की बात कर रही है। स्कूल परिसरों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित करने की योजनाएं बनाई गई थीं, लेकिन कई विद्यालयों में यह कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है। कुछ स्कूलों में निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है तो कई जगह योजनाएं केवल दस्तावेजों तक सीमित दिखाई दे रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्कूल स्तर पर वर्षा जल संचयन की प्रभावी व्यवस्था विकसित हो जाए तो जल संरक्षण के साथ-साथ विद्यार्थियों में भी पर्यावरण जागरूकता बढ़ेगी।

    प्रमुख कमियां

    • कई स्कूलों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अधूरा
    • जल निकासी और ड्रेनेज व्यवस्था कमजोर
    • सूखी शाखाओं और जर्जर पेड़ों की छंटाई नहीं
    • बाउंड्री वॉल में दरारें और मरम्मत की जरूरत
    • बारिश के दौरान जलभराव की आशंका

    बारिश से पहले नहीं सुधरी जल निकासी व्यवस्था
    मानसून के आगमन से पहले स्कूल परिसरों में नालियों की सफाई, जल निकासी मार्गों की मरम्मत और ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त किया जाना आवश्यक माना जाता है। लेकिन कई सरकारी स्कूलों में यह काम अधूरा मिला। निरीक्षण के दौरान कुछ विद्यालयों में नालियां गंदगी से भरी मिलीं, जबकि कई स्थानों पर पानी निकासी के उचित प्रबंध नहीं दिखाई दिए। स्थानीय स्तर पर आशंका जताई जा रही है कि तेज बारिश होने पर स्कूल परिसरों में जलभराव की स्थिति बन सकती है, जिससे पढ़ाई और विद्यार्थियों की सुरक्षा दोनों प्रभावित होंगी।

    सूखी और जर्जर शाखाएं बन सकती हैं खतरा
    कई स्कूल परिसरों में वर्षों पुराने पेड़ मौजूद हैं। इन पेड़ों की सूखी शाखाएं और झुकी हुई टहनियां अब भी नहीं काटी गई हैं। बरसात और तेज हवाओं के दौरान इनके टूटकर गिरने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि स्कूल खुलने से पहले इन पेड़ों की छंटाई कराना जरूरी है, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके। पिछले वर्षों में प्रदेश के कई हिस्सों में पेड़ या शाखा गिरने से हादसे हो चुके हैं।

    स्कूल की पिछली दीवार बनी चिंता का कारण
    कई विद्यालयों में बाउंड्री वॉल की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई। कुछ स्कूलों की पिछली दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई दीं, जिससे उनकी मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश के दौरान कमजोर दीवारों को और नुकसान पहुंच सकता है। यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। इससे न केवल विद्यार्थियों बल्कि आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

    स्कूल खुलने से पहले कार्रवाई की मांग
    अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्कूल खुलने से पहले सभी सरकारी विद्यालयों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। अधूरे निर्माण कार्यों को तत्काल पूरा कराया जाए और जर्जर भवनों, दीवारों तथा पेड़ों की स्थिति की जांच कर आवश्यक सुधार किए जाएं। लोगों का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ विद्यार्थियों की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। क

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