
भोपाल: मध्य प्रदेश के बहुचर्चित एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है. पांच दिनों की कड़े केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद, मंगलवार को आरोपियों को विशेष अदालत में पेश किया गया. कोर्ट ने मामले की गंभीरता और अब तक सामने आए तथ्यों को देखते हुए मुख्य आरोपी सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह को 16 जून तक यानी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है. यह पूरी कानूनी कार्यवाही जज शोभना भलावे की अदालत में संपन्न हुई.
इससे पहले, CBI ने सोमवार को भोपाल के बाग मुगलिया एक्सटेंशन स्थित आवास पर ट्विशा की हाइट और 80 किलो वजन के पुतले के साथ क्राइम सीन रीक्रिएट किया था. इस जांच और पिछले 72 घंटों में दागे गए 72 तीखे सवालों के दौरान पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के बयानों में भारी विरोधाभास (झोल) देखने को मिला था.
गले में ‘बेल्ट’ का फंदा महज 10 सेकंड में खोल देने के दावों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर मिले चोट के निशानों को लेकर जब CBI ने कड़ाई से पूछताछ की, तो दोनों आरोपी कोई ठोस और संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए थे. इसी विरोधाभास को आधार बनाकर जांच को आगे बढ़ाने की तैयारी की गई.
CBI की पूछताछ के दौरान सास गिरिबाला सिंह ने दावा किया कि वे ट्विशा के अंतरजातीय विवाह से खुश थीं और शादी के बाद पांच महीनों में उन्होंने ट्विशा को करीब सात लाख रुपये की आर्थिक मदद भी दी थी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ट्विशा एंजायटी, पर्सनैलिटी डिसऑर्डर और एडजस्टमेंट जैसी मानसिक समस्याओं से जूझ रही थी, जिसका इलाज भी चल रहा था.
वहीं, पति समर्थ सिंह ने अपनी सफाई में कहा कि घटना वाले दिन (12 मई) सब कुछ सामान्य था. दोनों ने साथ में डिनर किया और टीवी देखा, लेकिन अचानक ट्विशा की मां का फोन आने के बाद स्थितियां बदल गईं. समर्थ का दावा है कि जब उसने ट्विशा को लटका देखा, तो उसने पैर पकड़े और उसकी मां ने बेल्ट हटाई, जिसके बाद सीपीआर देकर उसे एम्स अस्पताल ले जाया गया.
भले ही आरोपियों ने खुद को बेकसूर बताने की कोशिश की, लेकिन सीबीआई के कई सवालों जैसे, “घटना के बाद समर्थ फरार क्यों हुआ?”, “घटनास्थल के पास के अस्पतालों को छोड़कर सीधे एम्स क्यों ले जाया गया?” और “ट्विशा के शरीर पर मृत्यु से पहले चोट के निशान कैसे आए?”, इन पर दोनों चुप्पी साध गए.
जज शोभना भलावे की कोर्ट में चली इस महत्वपूर्ण सुनवाई के बाद, सीबीआई रिमांड की अवधि पूरी होने पर अदालत ने दोनों आरोपियों को राहत न देते हुए सीधे 14 दिन के लिए जेल (न्यायिक हिरासत) भेजने का फरमान सुना दिया. अब 16 जून तक दोनों आरोपी सलाखों के पीछे रहेंगे, जबकि सीबीआई इस दौरान फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों की अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है.
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