नई दिल्ली। दिल्ली के मालवीय नगर (Malviya city in Delhi) में हुए भीषण अग्निकांड ने राजधानी को झकझोर कर रख दिया। होटल में लगी आग (Hotel catches fire) की भयावहता का अंदाजा घटनास्थल की हालत से लगाया जा सकता है। प्रत्यक्षदर्शियों और राहत-बचाव में जुटे लोगों के अनुसार, आग इतनी तेज थी कि इमारत के भीतर मौजूद कई सामान पूरी तरह जलकर खाक हो गए। मृतकों और घायलों की स्थिति ने भी हादसे की गंभीरता को उजागर किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बंद इमारतों में आग तेजी से फैलने की स्थिति में तापमान बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है। कुछ परिस्थितियों में यह 1000 डिग्री सेल्सियस के करीब भी जा सकता है, हालांकि वास्तविक तापमान का पता तकनीकी और फोरेंसिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
क्या इंसानी शरीर ‘पिघल’ सकता है?
बर्न विशेषज्ञों के अनुसार, मानव शरीर का कोई निश्चित ‘मेल्टिंग पॉइंट’ नहीं होता। शरीर पानी, वसा, प्रोटीन और अन्य ऊतकों से बना होता है, जो अत्यधिक गर्मी में पिघलने के बजाय गंभीर रूप से जलने और नष्ट होने लगते हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि 120 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर शरीर के ऊतक बुरी तरह प्रभावित होने लगते हैं। शरीर का पानी भाप में बदलने लगता है, प्रोटीन टूटने लगते हैं और ऊतक तेजी से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। ऐसे में बंद जगहों पर लगी आग बेहद घातक साबित हो सकती है।
कैसे बढ़ा हादसा? मिनट-दर-मिनट घटनाक्रम
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल आग लगने के कारणों और भीतर तापमान की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए जांच जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि फायर पैटर्न, क्षति और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि आग कितनी तीव्र थी और किन वजहों से इतनी तेजी से फैली।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved