
नई दिल्ली। केंद्र सरकार (Central Government) बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, लंबे समय से लंबित परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) को फिर से धरातल पर उतारने की सक्रिय कोशिशें शुरू हो चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य साल 2029 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) से पहले देश में संसदीय क्षेत्रों के पुनर्गठन की प्रक्रिया को पूरा करना है।
इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर सरकार किसी भी टकराव से बचना चाहती है। यही वजह है कि पर्दे के पीछे आम सहमति बनाने का दौर शुरू हो चुका है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र ने कई क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के साथ औपचारिक बातचीत शुरू कर दी है। इन चर्चाओं में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, तृणमूल कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय हितधारक शामिल हैं। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य संसदीय प्रतिनिधित्व पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर क्षेत्रीय दलों की चिंताओं को दूर करना है।
परिसीमन का सीधा मतलब जनसांख्यिकीय बदलावों के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को दोबारा तय करना है। बीते कुछ वर्षों में कई राज्यों ने इस बात पर चिंता जताई है कि नई व्यवस्था से संसद में उनका प्रतिनिधित्व बदल सकता है। इस राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी प्रमुख दलों के बीच एक साझा ढांचा तैयार नहीं हो जाता, तब तक इसे संसद में पेश नहीं किया जाएगा। विधेयक को पेश करने का समय पूरी तरह से जारी बातचीत के नतीजों पर निर्भर करेगा।
चुनावी सुधारों की यह कड़ियां केवल परिसीमन तक ही सीमित नहीं हैं। केंद्र सरकार इसके साथ ही ‘एक देश, एक चुनाव’ यानी देश में एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव पर भी आगे बढ़ रही है। क्षेत्रीय दलों के साथ हो रही बैठकों में इन दोनों ही बड़े मुद्दों को मेज पर रखा गया है। अगर सरकार इस मोर्चे पर राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहती है, तो अगले आम चुनाव से पहले देश के चुनावी प्रतिनिधित्व की पूरी तस्वीर बदल जाएगी। हालांकि, फिलहाल बातचीत का दौर जारी है और अंतिम फैसला होना बाकी है।
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