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कागजों में दौड़ रहा विकास जमीन पर रेंग रहे बड़े प्रोजेक्ट

June 05, 2026

  • 311 करोड़ मिले, 112 करोड़ के काम अटके, तीन साल बाद भी आधे अधूरे विकास के सपने

जबलपुर। शहर और जिले के विकास के लिए शुरू की गई रीडेंसिफिकेशन स्कीम सुस्त रफ्तार का शिकार होती नजर आ रही है। करोड़ों रुपये की लागत से शुरू किए गए अधिकांश निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा के करीब पहुंचने के बावजूद अधूरे पड़े हैं। स्थिति यह है कि 112 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई 16 परियोजनाओं में से अब तक केवल दो ही पूरी हो सकी हैं, जबकि करीब 54 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद कुल कार्य प्रगति 50 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच पाई है।



  • सिविल लाइन स्थित बर्न कंपनी की लगभग 9 एकड़ भूमि को शासन ने रीडेंसिफिकेशन योजना में शामिल किया था। इस जमीन की नीलामी से सरकार को कलेक्टर गाइडलाइन के अनुमानित 172 करोड़ रुपये के मुकाबले 311 करोड़ रुपये की आय हुई थी। इसी राशि के एवज में मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड द्वारा जिले में 16 महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों का अनुबंध किया गया था। इन परियोजनाओं की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी और इन्हें 36 माह के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। अब जून-जुलाई 2026 में समयसीमा समाप्त होने जा रही है, लेकिन अधिकांश परियोजनाएं अधूरी हैं। अब तक केवल कुंडम में एसडीएम एवं तहसीलदार कार्यालय भवन और कुंडम के 14 कर्मचारी आवास पूर्ण हो पाए हैं। बाकी 14 परियोजनाओं पर काम या तो धीमी गति से चल रहा है या कई जगह अभी शुरुआती चरण में ही है।

    54 करोड़ खर्च, नतीजे सीमित
    रिकॉर्ड के अनुसार 112 करोड़ रुपये की परियोजनाओं में अब तक लगभग 54 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इनमें सबसे अधिक करीब 32 करोड़ रुपये महाधिवक्ता कार्यालय भवन पर और लगभग 20 करोड़ रुपये नयागांव आवासीय परियोजना पर व्यय किए गए हैं।

    देरी के पीछे क्या वजह?
    निर्माण एजेंसियां भूमि स्वीकृति, तकनीकी अनुमति और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को देरी का कारण बता रही हैं। हालांकि समयसीमा समाप्त होने के करीब होने के बावजूद कई परियोजनाओं की प्रगति बेहद धीमी है, जिससे विकास कार्यों पर सवाल उठ रहे हैं।

    जून तक महाधिवक्ता कार्यालय पूरा करने का दावा
    मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का कहना है कि सभी निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग के अनुसार महाधिवक्ता कार्यालय भवन को 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि एल्गिन और विक्टोरिया अस्पताल की परियोजनाओं में भी काम तेज किया जा रहा है।

    प्रमुख परियोजनाओं की स्थिति

    • महाधिवक्ता कार्यालय भवन: 32 करोड़ की लागत, लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण।
    • नया कमिश्नर कार्यालय भवन: करीब 20 प्रतिशत कार्य।
    • कलेक्टर कार्यालय उन्नयन: 24 प्रतिशत कार्य।
    • जिला अस्पताल नई ओपीडी: 47 प्रतिशत कार्य।
    • मॉडल स्कूल में कक्ष, स्पोर्ट्स हॉल व मीटिंग हॉल: 12 प्रतिशत कार्य।
    • ब्योहारबाग कन्या शाला भवन: 55 प्रतिशत कार्य।
    • लेडी एल्गिन अस्पताल में 100 बेड वार्ड : 46 प्रतिशत कार्य।
    • नयागांव में अधिकारी-कर्मचारी आवास : लगभग 77 प्रतिशत कार्य।
    • सिहोरा, पनागर, पाटन, मझौली और शहपुरा में आवासीय परियोजनाएं: अधिकांश स्थानों पर कार्य बेहद धीमी गति से जारी।

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