img-fluid

कलेक्टर रेट सिर्फ कागज़ों में… लोकसेवा केंद्रों में अकुशल मजदूर से भी कम वेतन

July 22, 2026

Real estate brokers pointed to signing agreement documents.

  • आउटसोर्स व्यवस्था पर उठे सवाल, कर्मचारियों ने ठेकेदारों की मनमानी का लगाया आरोप

जबलपुर। जिले के लोकसेवा केंद्रों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें शासन द्वारा निर्धारित कलेक्टर रेट के अनुसार वेतन नहीं दिया जा रहा, बल्कि ठेकेदार अपनी मनमर्जी से 5 से 9 हजार रुपये प्रतिमाह तक का भुगतान कर रहे हैं। यदि यह आरोप सही हैं, तो यह न केवल श्रम नियमों के पालन पर सवाल खड़े करता है, बल्कि आउटसोर्स व्यवस्था की निगरानी पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।कर्मचारियों का दावा है कि कलेक्ट्रेट सहित जिले के विभिन्न लोकसेवा केंद्रों में कई कर्मचारी पिछले 10 से 15 वर्षों से कार्यरत हैं। इसके बावजूद उन्हें शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतनमान का लाभ नहीं मिल रहा। कई कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों की सेवा के बाद भी उनका मासिक वेतन 8 हजार रुपये से आगे नहीं बढ़ पाया, जबकि कुछ कर्मचारियों को 5 से 6 हजार रुपये तक ही भुगतान किया जा रहा है।


  • कलेक्टर रेट और वास्तविक भुगतान में बड़ा अंतर
    श्रेणी निर्धारित      मासिक वेतन
    अकुशल                12,425
    अर्धकुशल             13,421
    कुशल                   15,144
    उच्च कुशल           16,769

    आवाज उठाई तो नौकरी चली गई
    कुछ कर्मचारियों का आरोप है कि वेतन संबंधी शिकायत उठाने पर उन्हें नौकरी जाने का डर रहता है। उनका कहना है कि इस कारण अधिकांश कर्मचारी खुलकर अपनी बात भी नहीं रख पाते। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित विभाग स्वत: संज्ञान लेकर जांच नहीं करते, जिससे समस्याएं वर्षों तक बनी रहती हैं।

    कम वेतन से बढ़ रही आर्थिक परेशानी
    लोकसेवा केंद्रों में कार्यरत कई कर्मचारी किराए के मकानों में रहते हैं और प्रतिदिन दूर-दराज़ से कार्यालय आते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सीमित वेतन का बड़ा हिस्सा किराया, पेट्रोल और दैनिक खर्चों में ही समाप्त हो जाता है, जिससे परिवार का पालन-पोषण कठिन हो रहा है।

    ठेकेदार रेट चलने का आरोप
    आरोप है कि जिस कलेक्ट्रेट कार्यालय से आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए वेतन दरों का निर्धारण होता है, उसी परिसर में संचालित लोकसेवा केंद्रों में कलेक्टर रेट का पालन नहीं किया जा रहा। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन पूरी तरह ठेकेदार की मर्जी पर निर्भर है और उसके लिए कोई पारदर्शी व्यवस्था दिखाई नहीं देती।

    कुशल-अकुशल का निर्धारण भी सवालों के घेरे में
    कर्मचारियों के अनुसार आउटसोर्स कर्मचारियों को किस श्रेणी—अकुशल, अर्धकुशल, कुशल या उच्च कुशल—में रखा गया है, इसका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड या मानक उन्हें नहीं बताया जाता। उनका आरोप है कि इसी अस्पष्टता का लाभ उठाकर वेतन मनमाने ढंग से तय किया जाता है।

    Share:

  • 218 अधिकारियों और कर्मचारियों के पदोन्नति से निगम में उत्सवी माहौल

    Wed Jul 22 , 2026
    जबलपुर। मध्यप्रदेश शासन की जनकल्याणकारी और कर्मचारी-हितैषी पहल पर नगर निगम में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है। लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे नगर निगम के 218 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एक साथ पदोन्नति का लाभ प्रदान किया गया है। इस निर्णय से न केवल कर्मचारियों के चेहरे खिल उठे […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved