
गुना। गुना (Guna) शहर के बूढ़े बालाजी और पुरानी छावनी क्षेत्र में पीने का पानी लोगों के लिए जहर साबित हो रहा है। पिछले एक सप्ताह से नलों में आ रहे दूषित पानी के कारण एक दर्जन से अधिक परिवारों के करीब 15 मासूम गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। उल्टी, दस्त और पेट में तेज दर्द की शिकायत के बाद सभी बच्चों को जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती कराया गया है। एक साथ इतने बच्चों के बीमार होने से स्वास्थ्य विभाग और नगर प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
शनिवार शाम वार्ड पार्षद प्रतिनिधि लालाराम लोधा को सूचना मिली कि हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी सहित आसपास के क्षेत्रों में कई बच्चे अचानक बीमार हो गए हैं। सूचना मिलते ही वे क्षेत्र में पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। बाद में जिला अस्पताल पहुंचने पर उन्होंने देखा कि बूढ़े बालाजी और पुरानी छावनी क्षेत्र के डेढ़ दर्जन से अधिक बच्चे ड्रिप लगाकर उपचार ले रहे हैं।
लालाराम लोधा ने बताया कि इलाके में लंबे समय से दूषित पानी की शिकायतें मिल रही थीं। नल से आने वाला पानी देखने में साफ प्रतीत होता है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार उसमें खतरनाक बैक्टीरिया मौजूद हैं। उन्होंने जनस्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र की जल वितरण पाइपलाइन कई स्थानों से क्षतिग्रस्त है। इन दरारों के जरिए नालियों का गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल रहा है। चार महीने पहले पानी की टंकी की सफाई कराई गई थी, लेकिन टूटी पाइपलाइनों की मरम्मत नहीं होने से समस्या लगातार बनी हुई है।
अस्पताल में भर्ती बच्चों के परिजनों ने बताया कि पहले उन्होंने स्थानीय चिकित्सकों से इलाज कराया, लेकिन बच्चों की हालत में सुधार नहीं हुआ। कमजोरी, बुखार और लगातार दस्त बढ़ने पर उन्हें जिला अस्पताल लाना पड़ा। कई बच्चों को दस्त के साथ खून आने की शिकायत भी रही। निजी अस्पतालों में इलाज पर खर्च करने के बावजूद राहत नहीं मिली। डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच में संक्रमण का कारण दूषित पानी बताया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएचओ डॉ. राजकुमार ऋषीश्वर और नगर पालिका सीएमओ तेज सिंह यादव रविवार सुबह जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और चिकित्सकों को 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए। साथ ही पीएचई विभाग के अधिकारियों को तलब कर प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल जांच के आदेश दिए गए।
तकनीकी टीम ने विभिन्न घरों से पानी के नमूने एकत्र किए हैं और क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों की पहचान शुरू कर दी है। कलेक्टर किशोर कन्याल ने मामले को गंभीर मानते हुए पीएचई और नगर पालिका को 48 घंटे के भीतर पाइपलाइन सुधारने तथा प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन को पानी के नमूनों की जांच में तेजी लाने को कहा गया है।
कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि जांच में लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी और बारिश के मौसम में पाइपलाइन रिसाव के कारण जलजनित बीमारियां तेजी से फैलती हैं। ऐसे में समय पर मरम्मत नहीं होना गंभीर लापरवाही माना जा रहा है।
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