काबुल। अफगानिस्तान में महिलाओं पर बढ़ती पाबंदियों के बीच पश्चिमी शहर हेरात (Western City Herat) से एक बार फिर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। तालिबान (Taliban) की नैतिकता पुलिस ने महिलाओं के लिए सख्त ड्रेस कोड (Dress Code) लागू कराने को लेकर बड़े पैमाने पर अभियान चलाया, जिसके बाद शहर में भय और तनाव का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, सशस्त्र अधिकारी सड़कों पर वाहनों को रोककर महिलाओं के पहनावे की जांच करते दिखे और कथित रूप से नियमों का पालन न करने वालों को हिरासत में लिया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तालिबान के ‘प्रचार-ए-सदाचार एवं दुराचार निवारण मंत्रालय’ (PVPV) की टीमों ने शनिवार को हेरात में विशेष अभियान चलाया। इस दौरान बसों, टैक्सियों और निजी वाहनों की जांच की गई। आरोप है कि चादर या बुर्का न पहनने वाली महिलाओं को रोककर पूछताछ की गई और कई मामलों में हिरासत में भी लिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि कुछ अधिकारी हथियारों और चाबुक के साथ सड़कों पर गश्त करते नजर आए।
स्थानीय महिलाओं ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत में बताया कि हालात इतने भयावह हो गए हैं कि लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं। एक महिला ने दावा किया कि उसने अधिकारियों को कुछ महिलाओं को जबरन वाहन में बैठाते देखा, जबकि वे हिजाब, नकाब और अबाया पहने हुई थीं। दूसरी प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, कई वाहनों को रोककर अंदर बैठी महिलाओं के कपड़ों की जांच की जा रही थी।
इस घटनाक्रम पर संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) ने चिंता जताई है। मिशन ने बयान जारी कर कहा कि ड्रेस कोड के कथित उल्लंघन के आधार पर महिलाओं को हिरासत में लेने की खबरें गंभीर चिंता का विषय हैं। संयुक्त राष्ट्र ने तालिबान प्रशासन से महिलाओं के बुनियादी अधिकारों का सम्मान करने और मनमानी कार्रवाई रोकने की अपील की है।
अभियान के बाद शहर में महिलाओं की सार्वजनिक मौजूदगी काफी कम होने की बात सामने आई है। स्थानीय टैक्सी चालकों का कहना है कि उन्हें बिना तय ड्रेस कोड वाली महिलाओं को वाहन में न बैठाने की चेतावनी दी गई है। इससे महिलाओं की आवाजाही और सीमित हो गई है।
हालांकि, तालिबान प्रशासन का कहना है कि ड्रेस कोड और अन्य नियम इस्लामी कानून और देश की व्यवस्था का हिस्सा हैं। वहीं मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि इन कदमों से अफगानिस्तान में महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से धीरे-धीरे बाहर किया जा रहा है और हालात 1990 के दशक के तालिबान शासन जैसे बनते जा रहे हैं।
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