वाशिंगटन। वैश्विक स्तर पर चीन (China) के बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव का मुकाबला करने के लिए अमेरिका (America) नई योजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। ट्रंप प्रशासन विभिन्न देशों में ऐसी परियोजनाओं पर सैकड़ों मिलियन डॉलर खर्च करने की तैयारी में है, जिनका उद्देश्य चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करना है। इनमें कई परियोजनाएं ऐसी हैं जिन्हें पिछले वर्ष बजट और कर्मचारियों में कटौती के कारण रोक दिया गया था, लेकिन अब उन्हें दोबारा शुरू करने की योजना बनाई जा रही है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही में कांग्रेस को जानकारी दी है कि वह 175.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत से कैरेबियाई और मध्य अमेरिकी देशों में समुद्र के भीतर बिछी पुरानी दूरसंचार (अंडरसी टेलीकम्युनिकेशन) केबलों को बदलने की योजना पर काम कर रहा है।
अमेरिका का मानना है कि यदि इन संचार नेटवर्क का समय रहते आधुनिकीकरण नहीं किया गया तो चीन इस क्षेत्र में अपनी तकनीकी और रणनीतिक मौजूदगी और मजबूत कर सकता है।
अमेरिका लंबे समय से पश्चिमी गोलार्ध में चीन के बढ़ते निवेश और रणनीतिक विस्तार को लेकर चिंता जताता रहा है। खासकर पनामा नहर के आसपास बंदरगाहों में चीनी कंपनियों की भागीदारी, बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत विकसित हो रहे बुनियादी ढांचे तथा दूरसंचार क्षेत्र में चीन के निवेश को वाशिंगटन अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील मानता है।
अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर कहा कि चीन की कई आर्थिक परियोजनाएं शुरुआत में कम लागत वाली दिखाई देती हैं, लेकिन बाद में रखरखाव खर्च, अतिरिक्त शुल्क और प्रदर्शन संबंधी समस्याओं के कारण वे अधिक महंगी साबित हो सकती हैं। अधिकारी के अनुसार, ऐसी परियोजनाएं अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए रणनीतिक जोखिम भी पैदा कर सकती हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अंडरसी केबल परियोजना चीन के प्रभाव को सीमित करने की व्यापक अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है। आने वाले समय में अमेरिका इसी तरह की कई अन्य अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं पर भी सैकड़ों मिलियन डॉलर अतिरिक्त निवेश कर सकता है, ताकि रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत रखी जा सके।
यह पहल ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग सार्वजनिक मंचों पर सहयोग और संवाद की बात कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, शी चिनपिंग के इस वर्ष सर्दियों में अमेरिका दौरे की भी तैयारी चल रही है।
हालांकि, कूटनीतिक संवाद जारी रहने के बावजूद दोनों देशों के बीच तकनीक, व्यापार, बुनियादी ढांचे और वैश्विक रणनीतिक प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बनी हुई है। अमेरिका की नई निवेश योजनाओं को भी इसी व्यापक भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved