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किसान आंदोलन: राजधानी में दाखिल होने से पहले CM हाउस की सुरक्षा सख्त, हर रास्ते पर पुलिस की नजर

July 28, 2026

भोपाल। मध्यप्रदेश में मूंग की पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदने समेत किसानों की आठ सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन मंगलवार को और तेज हो गया है। नर्मदापुरम से भोपाल के लिए निकली संयुक्त किसान मोर्चा की पदयात्रा सोमवार को प्रशासन की रोक-टोक के बावजूद आगे बढ़ती रही। किसानों के भोपाल की ओर बढ़ने के साथ ओबैदुल्लागंज से भोपाल की तरफ जाने वाला हाईवे बंद है, वहीं जबलपुर की तरफ से सुल्तानपुर मार्ग भी प्रभावित है।

हालांकि इसके बावजूद 500 से अधिक किसान पैदल ही वैकल्पिक रास्तों से आगे बढ़ गए। पुलिस ने नेशनल हाईवे-45 पर बैरिकेडिंग कर किसानों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन किसान बैरिकेड पार कर मंडीदीप होते हुए भोपाल की ओर रवाना हो गए। मौके पर रायसेन, विदिशा, सीहोर, नर्मदापुरम (होशंगाबाद) और बैतूल जिले का भारी पुलिस बल तैनात रहा। रायसेन कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक भी पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर मौजूद रहे।

किसान पदयात्रा सोमवार को नर्मदापुरम से आगे बढ़ी। प्रशासन ने रास्ते में बैरिकेडिंग कर किसानों को रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे। नर्मदा पुल के पास से लेकर बुधनी क्षेत्र तक कई जगह पुलिस और किसानों के बीच आमना-सामना हुआ। किसानों ने रास्ते में लगाए गए पांच बैरिकेड हटाकर आगे का रास्ता बनाया। इसके बाद यात्रा बरखेड़ा तक पहुंची। रात में विश्राम के बाद मंगलवार को किसानों ने भोपाल की तरफ फिर कूच किया।

पहले दिन करीब सुबह 9 बजे से शाम 7:30 बजे तक अलग-अलग स्थानों पर किसानों और पुलिस के बीच गतिरोध बना रहा। प्रशासन ने नर्मदापुरम शहर में प्रवेश से लेकर सेठानी घाट, इंदिरा चौक, भोपाल चौराहा और डोंगरवाड़ा सहित कई जगहों पर किसानों को रोकने का प्रयास किया। हालांकि, किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। पदयात्रा में युवा किसानों के साथ बुजुर्ग भी शामिल रहे। सोमवार की लंबी पैदल यात्रा के बाद किसान बरखेड़ा पहुंचे और मंगलवार को फिर राजधानी की ओर बढ़े।


  • किसानों के भोपाल की ओर बढ़ने के कारण ओबैदुल्लागंज-भोपाल मार्ग पर यातायात प्रभावित है। इसके साथ जबलपुर की ओर से आने वाले वाहनों के लिए सुल्तानपुर मार्ग भी प्रभावित होने की सूचना है। ऐसे में भोपाल की तरफ आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है जब मूंग की एमएसपी खरीदी को लेकर प्रदेश में किसान पहले से प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले भी किसानों ने हाईवे जाम और विधानसभा घेराव की चेतावनी दी थी।

    किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि औबेदुल्लागंज स्थित गुरुद्वारे में किसानों के ठहरने की व्यवस्था थी, लेकिन प्रशासन ने गुरुद्वारा बंद करा दिया। उनका कहना है कि नर्मदापुरम में आंदोलन के चलते देरी होने के बाद किसानों को रात बरखेड़ा में गुजारनी पड़ी।

    किसानों की मांगों की सूची में मूंग की 100 प्रतिशत उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए, ई-टोकन व्यवस्था खत्म की जाए, एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी दी जाए, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार किया जाए, अघोषित बिजली कटौती बंद की जाए, अनुदान पर ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराए जाएं, ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया जाए, भारत-अमेरिका ट्रेड डील समाप्त करने की मांग की है।

    संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि सिर्फ आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा। किसानों का कहना है कि सरकार को मूंग की पूरी उपज एमएसपी पर खरीदने सहित सभी मांगों पर ठोस फैसला लेना होगा। इसके बाद ही आंदोलन वापस लेने पर विचार किया जाएगा। फिलहाल किसानों का काफिला राजधानी की तरफ बढ़ रहा है और दो प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित होने से प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था के साथ ट्रैफिक मैनेजमेंट की भी चुनौती खड़ी हो गई है।

    मंगलवार सुबह किसानों का जत्था औबेदुल्लागंज पहुंचा, जहां से भोपाल के लिए आंदोलन का अगला चरण शुरू किया गया। पूरे मार्ग पर पुलिस और प्रशासन की कड़ी निगरानी रही, लेकिन किसान अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ते रहे। किसान नेताओं का कहना है कि फिलहाल यह तीन दिवसीय आंदोलन है। यदि इस दौरान सरकार ने 100 प्रतिशत मूंग खरीदी को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं की, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन कर दिया जाएगा। किसानों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। आंदोलन के भोपाल पहुंचने के साथ ही प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं।

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