
ढाका। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसक घटनाएं बढ़ी हैं। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने कहा है कि इस वर्ष के पहले छह महीनों में देशभर में सांप्रदायिक हिंसा की 257 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 44 लोगों की मौत हुई।
‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद’ की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच दर्ज घटनाओं में हत्या, हमले, महिलाओं के खिलाफ हिंसा, अपहरण, जबरन कब्जे और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ‘कुल 257 घटनाओं में से 40 मामलों में 44 लोगों की जान गई। इसके अलावा महिलाओं के खिलाफ हिंसा के पांच मामले सामने आए, जिनमें दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म के मामले भी शामिल हैं।’ संगठन ने अपहरण, जबरन वसूली और यातना के 10 मामलों का भी जिक्र किया है।
मानवाधिकार संगठन के अनुसार, अल्पसंख्यकों पर हमले, धमकियों और शारीरिक उत्पीड़न के 42 मामले दर्ज किए गए। वहीं धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर की गई हिंसा के 62 मामले सामने आए, जिनमें मूर्तियों को नुकसान पहुंचाना, लूटपाट और आगजनी शामिल हैं। धार्मिक संस्थानों की जमीन पर कब्जे या कब्जे के प्रयास के 15 मामले तथा घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर हमले, तोड़फोड़, लूट और आगजनी के 47 मामले दर्ज किए गए।
संगठन ने ईशनिंदा के आरोपों में गिरफ्तारी और उत्पीड़न के नौ मामलों, घरों, जमीन और व्यावसायिक संपत्तियों पर जबरन कब्जे के 21 मामलों और अन्य प्रकार की सांप्रदायिक हिंसा की छह घटनाओं का भी जिक्र किया।
परिषद ने बताया कि अगस्त 2024 से जून 2026 के बीच अल्पसंख्यक समुदायों के घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को प्रभावित करने वाली 2,055 घटनाएं दर्ज की गईं। संगठन के अनुसार, इसके कारण कई परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई और वे लंबे समय तक आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
परिषद ने भगवान राम की 81 फुट ऊंची प्रतिमा बनाने का प्रस्ताव रखने वाले हरिदास चंद्र तरणी दास की गिरफ्तारी पर भी चिंता जताई और इसे धार्मिक स्वतंत्रता तथा कानून के शासन के खिलाफ बताया। संगठन ने नवंबर 2024 से जेल में बंद हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई की मांग भी दोहराई।
इसके साथ ही बांग्लादेश में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा चिंता का सबब बनी हुई है। ढाका स्थित एक महिला अधिकार संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, देश में दुष्कर्म, हत्या, आत्महत्या, यौन उत्पीड़न, दहेज से जुड़ी हिंसा और बाल विवाह जैसी घटनाएं बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यौन हिंसा का सबसे अधिक खतरा बच्चियों को झेलना पड़ रहा है। बच्चियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म के 142, आत्महत्या के 203 और दुष्कर्म के प्रयास के 117 मामले दर्ज किए गए। वयस्क महिलाओं में हत्या के सबसे अधिक मामले सामने आए, जिनकी संख्या 756 रही। इसके अलावा 376 दुष्कर्म पीड़िताओं और 125 यौन उत्पीड़न के मामलों का भी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया।
उम्र के आधार पर किए गए विश्लेषण में पाया गया कि बचपन में बच्चियां यौन हिंसा के अधिक जोखिम में रहती हैं, जबकि उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं के खिलाफ हत्या और आत्महत्या का खतरा बढ़ता जाता है। वहीं, छात्राओं से जुड़े आंकड़े भी चिंताजनक रहे। दुष्कर्म के प्रयास के मामलों में छात्राओं की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत, आत्महत्या के मामलों में 67 प्रतिशत, सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में 39 प्रतिशत रही।
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