
तेज हवाओं में टकराती हैं लाइनें, चिंगारियों के बीच जान जोखिम में डाल रहे किसान और व्यापारी
इंदौर। चोइथराम सब्जी मंडी ( Choithram Mandi) इन दिनों बुनियादी अव्यवस्थाओं (Fundamental disarray) और बड़े हादसों के मुहाने पर खड़ी है। मंडी प्रशासन की घोर लापरवाही के चलते यहां व्यापार करने वाले व्यापारियों (Traders), दूर-दराज से आने वाले किसानों और दिन-रात मेहनत करने वाले हम्मालों (Workers) की जान दांव पर लगी है। मंडी परिसर में करोड़ों की लागत से विशाल डोम (dome) बनाए गए थे। एक डोम के ऊपर से गुजर रही बिजली की हाईटेंशन लाइन हर पल मौत को आमंत्रण दे रही है।
मंडी की दुकान नंबर 152 के ठीक ऊपर से हाईटेंशन बिजली की लाइन गुजर रही है। मंडी प्रशासन ने इसके बेहद करीब एक विशाल डोम का निर्माण तो करा दिया, लेकिन सुरक्षा मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया। स्थिति यह है कि यह हाईटेंशन लाइन डोम के लोहे के ढांचे से टकराती है। हल्की हवा चलते ही यहां जोरदार स्पार्किंग (चिंगारियां) होने लगती हैं। बारिश के मौसम में पूरे डोम में करंट फैलने का खतरा चौबीसों घंटे बना रहता है। स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि शिकायत करने पर मंडी प्रबंधन सिर्फ एक बांस लगाकर तार को दूर करने की खानापूर्ति कर देता है, जो तेज हवाओं में पूरी तरह नाकाम साबित होती है।
16 करोड़ खर्च फिर भी हर बारिश में समस्याओं से घिरे रहते व्यापारी-किसान
मंडी परिसर में करीब 16 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से दर्जनभर से ज्यादा डोम और शेड तैयार किए गए थे। वर्तमान में यहां 22 डोम और आधा दर्जन से अधिक टीनशेड हैं, लेकिन करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाने के बाद भी निर्माण कार्य की गुणवत्ता बेहद घटिया है। पहली ही बारिश में दुकानों की छतें रिसने लगती हैं और पनाले (वाटर ड्रेनेज पाइप) न होने के कारण पूरी मंडी कीचड़ हो जाता है। दुर्गंध की परेशानी भी यहां आम बात है। करोड़ों खर्च होने के बाद भी हर साल किसानों का माल भीगकर बर्बाद हो रहा है।
रात होते ही बदलती है सूरत… चाकूबाजी और नशाखोरी का गढ़
सुरक्षा के मोर्चे पर भी मंडी भगवान भरोसे है। रात ढलते ही मंडी परिसर में असामाजिक तत्वों का बोलबाला हो जाता है। परिसर में संचालित अवैध चाय-नाश्ते की दुकानों और सब्जी पार्लरों पर खुलेआम नशाखोरी चलती है। व्यापारियों और हमालों के अनुसार, सुरक्षा गार्डों की कमी या निष्क्रियता के चलते यहां आए दिन लूटपाट और चाकूबाजी की वारदातें आम हो चुकी हैं, जिससे देर रात या तडक़े आने वाले किसानों में भारी दहशत का माहौल है। यहां सुरक्षा में लगे गार्ड और चौकीदार दूसरे कामों में ही लगे रहते हैं। सुरक्षा व्यवस्था पर इनका ध्यान नहीं रहता।
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