
इंदौर। मेट्रो कॉर्पोरेशन द्वारा अब गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक यानी 17 किलोमीटर के एलिवेटेड कॉरिडोर पर ट्रेन शुरू की जा रही है। मगर अभी भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस रूट पर कितने यात्री मिलेंगे? पहले से ही घाटे में चल रही इन ट्रेनों में अभी 10 हजार से अधिक यात्रियों द्वारा रोजाना सफर करने का अनुमान लगाया जा रहा है, जबकि हकीकत यह है कि इस पूरे रूट पर कई सिटी बसें दौड़ती है, जिसका किराया मेट्रो की तुलना में कम ही है। जिस हिस्से में मेट्रो चलेगी, उसमें सिटी बस से सफर करने पर 30 रुपए का खर्चा आता है, जबकि इतनी ही दूरी के लिए मेट्रो कॉर्पोरेशन 80 रुपए तक का किराया वसूल करेगा। यानी बस की तुलना में 50 रुपए अधिक लगेंगे। यह अवश्य है कि समय बचेगा, लेकिन यात्रियों के पास निजी वाहन के अलावा बस, ई-रिक्शा सहित अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। दूसरी तरफ पार्किंग से लेकर अन्य समस्याएं भी कॉर्पोरेशन ने दूर नहीं की है।
इंदौर-भोपाल मेट्रो की लागत भी लेटलतीफी के चलते बढ़ गई है। कल कैबिनेट बैठक में भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट की बढ़ी हुई लागत और अतिरिक्त वित्त पोषण के लिए 13565.84 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई। इसमें मूल लागत 6941.40 करोड़ में 3092.22 करोड़ रुपए की अतिरिक्त लागत जोडक़र कुल 10 हजार 33.62 करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी दी। वहीं इंदौर मेट्रो के लिए जो अंडरग्राउंड रुट खजराना चौराहा से एमजी रोड के लिए बनाया गया उस पर कल भी कोई चर्चा-निर्णय नहीं हुआ। दूसरी तरफ मेट्रो कॉर्पोरेशन अभी गांधी नगर से रेडिसन चौराहा के बीच 16 स्टेशनों के माध्यम से ट्रेन का व्यावसायिक संचालन शुरू करने जा रहा है। 20-21 जून से इसका शुभारंभ होगा और उसके साथ ही लिए जाने वाले किराए, पार्किंग समस्या सहित अन्य पर सवाल उठने लगे हैं। इं
दौर मेट्रो का किराया देश में चल रही अन्य शहरों की मेट्रो की तुलना में ज्यादा है। यहां तक कि सबसे सफल दिल्ली मेट्रो से भी इंदौर मेट्रो का किराया अधिक है। हालांकि कॉर्पोरेशन का तर्क है कि लखनऊ मेट्रो का फेयर मॉडल इंदौर के लिए अपनाया गया है। भविष्य में भी कमेटी आंकलन कर किराए का निर्धारण कर सकेगी। दिल्ली मेट्रो की तुलना में जहां लगभग दो गुना किराया इंदौर मेट्रो में वसूल किया जाएगा, तो लखनऊ मेट्रो की तुलना में भी लगभग 30 रुपए की राशि अधिक ही ली जा रही है। 15 से अधिक मेट्रो स्टेशन की यात्रा करने पर लगभग 80 रुपए का खर्च आएगा, जबकि अभी इसी रूट पर जो सिटी बस चल रही है, उसमें इतनी ही दूरी तय करने के एवज में 30 रुपए चुकाना पड़ते हैं। सवाल यह है कि 50 रुपए अधिक देकर कितने यात्री बस से उतरकर मेट्रो ट्रेन में बैठेंगे? शुरुआत में मेट्रो का आनंद लेने के लिए भले ही कर ली जाए, मगर रोजाना इसका सफर करना आम आदमी को महंगा पड़ेगा।
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