
लखनऊ: देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में चुनावी बिगुल बजने में बेशक 7-8 महीने का वक्त है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभी से ही राज्य की राजनीतिक बिसात पर अपने सबसे घातक मोहरे चलने शुरू कर दिए हैं. विपक्ष के जातिगत समीकरणों PDA यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक और सोशल इंजीनियरिंग की काट ढूंढने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पुराने और सबसे भरोसेमंद ‘कालभैरव अवतार’ में लौट आए हैं. इस बार उनकी रणनीति दोगुनी आक्रामक है, जहां एक तरफ अपराधियों की रीढ़ तोड़ने के लिए बुलडोजर और एनकाउंटर की रफ्तार बढ़ा दी गई है, वहीं दूसरी तरफ बहुसंख्यक समाज को एकजुट करने के लिए ‘कट्टर हिंदुत्व’ के मुद्दे को चुनावी पिच पर सबसे आगे रख दिया गया है. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ ने इस बार ‘त्रिशूल रणनीति’ तैयार की है, जो कानून-व्यवस्था, राष्ट्रवाद-हिंदुत्व और धड़ाधड़ लिए जा रहे प्रशासनिक फैसलों पर टिकी है.
पिछले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश पुलिस ने सूबे के बड़े अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ एनकाउंटर ड्राइव को तेज कर दिया है. गाजियाबाद के खोड़ा में हुए सूर्य प्रताप चौहान हत्याकांड के मुख्य आरोपी असद के एनकाउंटर से लेकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में पैर में गोली लगने की घटनाएं अचानक अब रूटीन बन चुकी हैं. सिर्फ अपराधी ही नहीं, बल्कि उनके अवैध निर्माणों और जमीनों पर मुख्यमंत्री का पसंदीदा ‘ब्रांड बुलडोजर’ दोबारा पूरी ताकत से गरजने लगा है.
जब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और विपक्ष ने इन एनकाउंटरों को ‘प्रायोजित’ बताकर सरकार को घेरने की कोशिश की, तो सीएम योगी ने दो टूक लहजे में साफ कर दिया कि “जो भी कानून तोड़ेगा, उसके खिलाफ कानून अपने सबसे सख्त दायरे में रहकर काम करेगा, समाज के दुश्मनों के लिए कोई सहानुभूति नहीं होगी.”
विकास और सुशासन के दावों के साथ-साथ सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपनी चुनावी रैलियों में ‘सनातन और हिंदुत्व’ के एजेंडे को बेहद धारदार बना दिया है. मऊ और लखनऊ की हालिया जनसभाओं में उनके बयानों ने साफ कर दिया है कि वे चुनाव को ध्रुवीकरण और सांस्कृतिक गौरव के मुद्दे पर ले जाने की पूरी तैयारी में हैं.
सीएम योगी अपने भाषणों में जनता को सीधे संबोधित करते हुए कह रहे हैं कि “आपका एक वोट केवल सरकार नहीं चुनता, बल्कि आपके एक वोट की ताकत ने 500 साल की गुलामी के कलंक को धोकर अयोध्या धाम में भव्य राम मंदिर का निर्माण कराया है. यही एक वोट यूपी में माफियाओं को मिट्टी में मिलाता है.” इसके जरिए वे बंटे हुए हिंदू वोट बैंक को जातिगत दीवारों से ऊपर उठाकर एक मंच पर लाने का प्रयास कर रहे हैं.
योगी धड़ाधड़ प्रशासनिक फैसले और युवाओं को साधने की कोशिश में लग गए हैं. चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री ने युवाओं और सरकारी व्यवस्था को लेकर कई कड़े और त्वरित फैसले लिए हैं. जैसे पेपर लीक पर सख्त कानून. परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए सख्त से सख्त जेल और जुर्माने का प्रावधान. नौसेना शौर्य वाटिका जैसे सांस्कृतिक और राष्ट्रवाद से जुड़े प्रोजेक्ट्स के उद्घाटन के साथ युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर देने का रोडमैप तैयार किया जा रहा है.
जानकारों की राय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भली-भांति जानते हैं कि उत्तर प्रदेश की सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए उन्हें अपने मूल ‘फायरब्रांड’ और ‘कड़क प्रशासक’ वाले नैरेटिव पर ही दांव लगाना होगा. अपराधियों पर प्रशासनिक चाबुक और मंचों से हिंदुत्व की हुंकार, यही वह चक्रव्यूह है जिसमें वे विपक्ष के जातिगत समीकरणों को उलझाना चाहते हैं.
ऐसे में साफ है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की सियासी जंग बेहद तीखी होने वाली है, जहां एक तरफ अखिलेश यादव की सोशल इंजीनियरिंग होगी, तो दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ का ‘कालभैरव अवतार’ और उनका आजमाया हुआ बुलडोजर मॉडल होगा.
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